क्या 10 साल तक एक ही फ्लैट में रेंट पर रहने से आप हो जाएंगे प्रॉपर्टी के मालिक? किरायेदार दूर कर लें अपना हर कंफ्यूजन

कई मामलों में मकान मालिक की प्रॉपर्टी पर लंबे समय तक रहने के बाद किरायेदार उसपर कब्जा जमाकर बैठ भी जाते हैं. फिर मामला कोर्ट पहुंचता है. तारीख-दर-तारीख बदलती है, लेकिन मामले का निपटारा नहीं होता.

Published date india.com Published: December 22, 2025 5:46 PM IST
क्या 10 साल तक एक ही फ्लैट में रेंट पर रहने से आप हो जाएंगे प्रॉपर्टी के मालिक? किरायेदार दूर कर लें अपना हर कंफ्यूजन
सांकेतिक तस्वीर.

किराये पर रहने के दौरान अक्सर किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच अधिकारों की जानकारी के अभाव में वाद-विवाद होने लगता है. कई बार मकान मालिक बेवजह की दखलअंदाजी करते हैं. अचानक किराया बढ़ा देते हैं. बिना नोटिस घर छोड़ने को कहते हैं या गलत बर्ताव करते हैं. कई मामलों में भी देखा गया है कि किरायेदार मनमानी पर उतर आते हैं. वो एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी घर या फ्लैट नहीं छोड़ते. अगर छोड़कर जाते भी हैं, तो प्रॉपर्टी डैमेज करके जाते हैं. कई मामलों में मकान मालिक की प्रॉपर्टी पर लंबे समय तक रहने के बाद किरायेदार उसपर कब्जा जमाकर बैठ भी जाते हैं. फिर मामला कोर्ट पहुंचता है. तारीख-दर-तारीख बदलती है, लेकिन मामले का निपटारा नहीं होता.

आइए समझते हैं कि अगर 10 साल से ज्यादा वक्त तक एक ही प्रॉपर्टी में रेंट पर रहे, तो क्या किरायेदार को मालिकाना हक मिल जाता है? किन मामलों में मकान मालिक किरायेदार को हर्जाना देने के लिए बाध्य है? ऐसे कौन से कानून हैं, जिनके जरिए किरायेदारों और मकान मालिकों को संरक्षण दिया गया है:-

भारत में किरायेदारों के लिए कौन से कानून?
भारत में दो कानूनों के जरिए किरायेदारों को संरक्षण दिया गया है. पहला- रेंट कंट्रोल एक्ट, 1948. दूसरा-मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021. रेंट कंट्रोल एक्ट, 1948 कहता है कि मकान मालिक बिना सही वजह और बिना नोटिस दिए किराएदार को नहीं निकाल सकते हैं. अगर विवाद हो तो उसका हल कोर्ट के जरिए ही होगा. वहीं, मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 का मकसद किराये से जुड़ी समस्याओं, जैसे किराया न मिलना, जबरन बेदखली, बिना एग्रीमेंट किराएदारी जैसे मामलों को सुलझाना है. यह कानून केंद्र सरकार ने बनाया है, लेकिन इसे लागू करना राज्यों की मर्जी पर है.

क्या किरायेदार प्रॉपर्टी पर जमा सकता है हक?
हमारे देश में प्रॉपर्टी विवाद से जुड़े ऐसे कई मामले हैं, जिनमें किरायेदार लंबे समय से एक ही मकान या फ्लैट में किराये पर रह रहा है. मकान मालिक के नोटिस देने के बाद भी वो घर या फ्लैट खाली नहीं कर रहा. आमतौर पर, एक किरायेदार लंबे समय तक एक ही प्रॉपर्टी में रेंट पर रहने के बाद भी उसपर अपना अधिकार नहीं जमा सकता. हालांकि, इस एक्ट के कुछ अपवाद भी हैं. अगर किरायेदार किसी घर या फ्लैट में रेंट पर लंबे समय से रह रहा है, तो मालिकाना अधिकार का दावा कर सकता है.

क्या कहता है लिमिटेशन एक्ट 1963?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि ऐसे केस में लिमिटेशन एक्ट 1963 लागू होता है. इस एक्ट के तहत अगर कोई व्यक्ति प्राइवेट जमीन पर लगातार 12 साल तक बिना रोक-टोक के कब्जा बनाए रखता है, तो वह अदालत में जाकर उस जमीन पर अधिकार मांग सकता है. इसे प्रतिकूल कब्जा यानी एडवर्स पजेशन कहा जाता है. हालांकि, प्राइवेट प्रॉपर्टी के कब्जे के केस में संपत्ति के असली मालिक को किरायेदार के क्लेम को कोर्ट में चुनौती देने का पूरा अधिकार है. मामले का निपटारा पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाता है.

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सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ तो?
लिमिटेशन एक्ट 1963 सरकारी जमीन पर लागू नहीं होता. सरकारी जमीन पर कब्जा कर लेने से आप उसके मालिक नहीं बन सकते, क्योंकि वह जनता की संपत्ति होती है और उसका उपयोग जनहित में किया जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि सरकारी जमीन पर ऐसे कब्जे को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती.

फिर सरकारी जमीन पर लोगों को कैसे मिलता है पट्टा?
सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों में भी अपवाद मिल जाएंगे. कुछ राज्यों में सरकारों ने ऐसी नीतियां बनाई हैं, जिनके तहत लंबे समय से सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए हुए लोगों को पट्टा (Lease) का अधिकार दिया जा सकता है. उत्तर प्रदेश में भूमिहीन और जरूरतमंद लोगों को खेती या आवास के लिए सरकारी जमीन का पट्टा दिया जा सकता है. राजस्थान में 2014 में भू-राजस्व संहिता में संशोधन के तहत 30 साल से अधिक समय से सरकारी जमीन पर कब्जा रखने वालों को कलेक्टर दर पर एकमुश्त राशि जमा करके मालिकाना हक देने का प्रावधान है.

सरकारी जमीन पर ही मालिकाना हक लेना हो तो?
कुछ लोग सरकारी जमीन पर लंबे समय तक घर बनाकर रहते हैं और मालिकाना हक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं. सरकारी जमीन पर कब्जा करके कोर्ट से मालिकाना हक पाना बहुत कठिन होता है. इसके लिए आपको यह साबित करना होगा कि आपने वह जमीन बिना किसी की परमिशन के लगातार और खुले तौर पर कई सालों तक इस्तेमाल की है. ऐसे मामलों में सरकार की ओर से भी क्लेम बड़ा तगड़ा होता है.

क्या किरायेदार के पक्ष में है ये कानून?
ये कानून तभी किरायेदारों के पक्ष में हैं, जब वो लंबे समय से एक ही प्रॉपर्टी पर बिना रोक-टोक और झमेले के शांति से रह रहे हों. अगर सभी कानूनी शर्तों को पूरा करते हैं, तो मालिकाना हक को लेकर क्लेम कर सकते हैं. लेकिन, ये समझने की जरूरत है कि सिर्फ कब्जा करके किसी की प्रॉपर्टी पर हक नहीं लिया जा सकता. कोर्ट ने मकान मालिक या जमीन के असली मालिक को भी कानूनी अधिकार दिए हैं.

अब जान लीजिए किरायेदारों के ये अधिकार

भारत में किराएदारों को मकानमालिक की जबरदस्ती, मनमानी और गलत बर्ताव के खिलाफ कई कानूनी अधिकार दिए गए हैं:-

  1. हर किरायेदार को लिखित में रेंट एग्रीमेंट बनाने का अधिकार है. आमतौर पर रेंट एग्रीमेंट 11 महीने का बनाना ही सही रहता है.
  2. अगर आप किसी फ्लैट या मकान में रेंट पर रह रहे हैं, तो छोटे-मोटे बदलाव जैसे पर्दे लगाना, दीवारों पर पेंट करना, बल्ब, हैंगर, छोटा शेल्फ लगाने का काम कर सकते हैं.
  3. अगर आप फ्लैट या मकान में जरूरी मेंटेनेंस का काम करवाते हैं, तो इसके खर्च को आप सिक्योरिटी मनी या किराये से एडजस्ट कर सकते हैं.
  4. मकान मालिक अचानक से किरायेदार को मकान या फ्लैट खाली करने को नहीं कह सकता. आपको 2 महीने का नोटिस देना जरूरी है.
  5. अगर मकान मालिक आपको घर से जबरन निकलवाने की कोशिश करता है, तो आपके पास मकान मालिक के खिलाफ कोर्ट में केस करने का पूरा अधिकार है.
  6. मकान मालिक आपकी आपके घर में नहीं घुस सकता. ये आपकी निजता के खिलाफ है. इसके लिए आपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं.
  7. अगर मकान मालिक प्रॉपर्टी बेच रहा है, तो किरायेदारों को 3 महीने पहले इसकी जानकारी देनी होगी.
  8. फाइनेंशियल क्राइसिस की स्थिति में किरायेदार पर मकान मालिक दबाव नहीं बना सकता. किरायेदार को रेंट देने के लिए मोहलत पाने का अधिकार है.
  9. जब आप घर छोड़ेंगे, तब मकान मालिक को आपको सिक्योरिटी मनी लौटानी होगी. इसे वापस पाना आपका अधिकार है.

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