जानें क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, माल्या-नीरव मोदी जैसों पर कैसे होगी कार्यवाही

बता दें कि यह बिल लोकसभा में पहेल ही पारित हो चुका था. यह विधेयक भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश 2018 के स्थान पर लाया गया है.

Published date india.com Published: July 25, 2018 6:42 PM IST
जानें क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, माल्या-नीरव मोदी जैसों पर कैसे होगी कार्यवाही

नई दिल्ली. भगोड़े आर्थिक अपराधियों को भारत की विधि प्रक्रिया से बचने से रोकने, उनकी सम्पत्ति जब्त करने और उन्हें सजा देने के प्रावधान वाले भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 को बुधवार को राज्यसभा में पास हो गया. बता दें कि यह बिल लोकसभा में पहेल ही पारित हो चुका था. यह विधेयक भगोड़ा आर्थिक अपराधी अध्यादेश 2018 के स्थान पर लाया गया है.

ये हैं उद्देश्य और कारण
विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि आर्थिक अपराधी दंडात्मक कार्रवाई प्रारंभ होने की संभावना में या कभी-कभी ऐसी कार्यवाहियों के लंबित रहने के दौरान भारतीय कोर्टों के अधिकार क्षेत्र से भाग जाते हैं. भारतीय कोर्ट से ऐसे अपराधियों की अनुपस्थिति के कारण अनेक गड़बड़ियां पाई जाती हैं. इससे दंडात्मक मामलों में जांच में परेशानी होती है और अदालतों का कीमती समय खराब जाता है.

बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति खराब होती है
आर्थिक अपराधों के ऐसे अधिकांश मामलों में बैंक के कर्जों से संबंधित मामलों के कारण भारत में बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय स्थिति और खराब होती है. इसमें कहा गया है कि वर्तमान सिविल एवं न्यायिक उपबंध इस समस्या की गंभीरता से निपटने के लिए संपूर्ण रूप से पर्याप्त नहीं है. इस समस्या का समाधान करने के लिए और भारतीय न्यायालयों की अधिकारिता से बाहर बने रहने के माध्यम से भारतीय विधिक प्रक्रिया से बचने से आर्थिक अपराधियों को हतोत्साहित करने के उपाय के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018 लाया गया है.

अनुसूचित अपराधी
इसमें कहा गया है कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अनुसूचित अपराध किया है. ऐसे अपराध किए हैं जिनमें 100 करोड़ रूपये या उससे अधिक की रकम सम्मिलित है और वे भारत से फरार हैं या भारत में दंडात्मक अभियोजन से बचने या उसका सामना करने के लिये भारत आने से इनकार करते हैं. इसमें भगोड़ा आर्थिक अपराधी की सम्पत्ति की कुर्की का उपबंध किया गया है. इसमें कहा गया है कि किसी भी भगोड़े आर्थिक अपराधी को कोई सिविल दावा करने या बचाव करने की हकदारी नहीं होगी. ऐसे मामलों में विशेष न्यायालयों द्वारा जारी आदेशों के विरूद्ध उच्च न्यायालय में अपील करने की बात कही गई है.

एनएफआरए को भी मिली मंजूरी
केंद्र सरकार ने गुरुवार को नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी को भी मंजूरी दे दी. यह लिस्टेड कंपिनयों के साथ बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों की ऑडिट पर नजर रखेगा. इसका लक्ष्य चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के कामकाज पर नजर रखना है.

छोटे डिफॉल्टर्स पर भी नजर
सरकार की नजर बड़े डिफॉल्टर्स के साथ-साथ छोटे खिलाड़ियों पर भी है. घोटालों में ऐसे ही कुछ और डिफॉल्टर्स के होने का भी अंदेशा है. हाल ही में दिल्ली के करोल बाग के दास सेठ इंटरनेशनल का नाम भी सामने आया है. इसके प्रमोटर्स भी लोन चुकाए बिना देश से बाहर हैं. सीबीआई ने दिल्ली के एक ज्वैलर के खिलाफ भी 390 करोड़ का लोन नहीं चुकाने का मामला दर्ज किया है. इस ज्वैलर ने ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से यह लोन लिया था.

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