नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजल अब महंगे हो जाएंगे, क्योंकि सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उपकर (सेस) और उत्पाद कर बढ़ाने की घोषणा की है. वहीं, सोने पर सीमा शुल्‍क बढ़ा दिया गया है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार लोकसभा में आम बजट 2019-20 पेश करते हुए पेट्रोल और डीजल पर उपकर (सेस) के साथ-साथ उत्पाद कर में बढ़ोतरी की घोषणा की.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को बजट में पेट्रोल और डीजल पर उपकर में प्रति लीटर एक रुपए की वृद्धि करने की घोषणा की. इसके साथ ही सोने पर सीमा शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किया गया. सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश करते हुए कहा कि दो करोड़ से पांच करोड़ रुपए और पांच करोड़ रुपए से अधिक की कर योग्य आय वाले करदाताओं पर अधिभार बढ़ाया गया है.

उन्होंने कहा कि 50 करोड़ रुपए से ऊपर का कारोबार करने वाले प्रतिष्ठानों में डिजिटल लेनदेन पर कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट शुल्क नहीं लगेगा. बैंक खाते से एक करोड़ रुपए से अधिक की निकासी पर दो प्रतिशत की दर से टीडीएस लगाने की घोषणा की है.

वित्त मंत्री ने कहा कि इस वर्ष चरणबद्ध रूप से इलेक्ट्रॉनिक विधि से कर रिटर्न के मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसमें व्यक्ति को अधिकारी के सामने नहीं आना पड़ेगा.

वाणिज्य मंत्रालय आयात शुल्क में कटौती की सिफारिश की थी
सरकार ने यह प्रस्ताव ऐसे समय किया है जबकि घरेलू आभूषण उद्योग आयात शुल्क में कटौती की मांग कर रहा था. पूर्व में वाणिज्य मंत्रालय भी आयात शुल्क में कटौती की सिफारिश कर चुका है.

सोने का आयात तीन प्रतिशत घटकर 32.8 अरब डॉलर रह गया
वित्त वर्ष 2018-19 में मूल्य के हिसाब से सोने का आयात तीन प्रतिशत घटकर 32.8 अरब डॉलर रह गया. सोने के आयात में गिरावट से चालू खाते के घाटे (कैड) पर अंकुश रखने में मदद मिलती है.

बीते वित्त वर्ष में 982 टन सोने का आयात
वित्त वर्ष 2017-18 में बहुमूल्य धातुओं का कुल आया 33.7 अरब डॉलर रहा था. 2016-17 मं यह 27.5 अरब डॉलर और 2015-16 में 31.8 अरब डॉलर था. मात्रा के लिहाज से देखा जाए तो देश ने बीते वित्त वर्ष में 982 टन सोने का आयात किया.

आभूषणों का निर्यात 5.32 प्रतिशत घटकर 30.96 अरब डॉलर रहा 
वित्त वर्ष 2017-18, 2016-17 और 2015-16 में सोने का आयात क्रमश: 955 टन, 778 टन और 968 टन रहा था. भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े आयातकों में से है. आयात से मुख्य रूप से घरेलू आभूषण उद्योग की जरूरत को पूरा किया जाता है. बीते वित्त वर्ष में रत्न एवं आभूषणों का निर्यात 5.32 प्रतिशत घटकर 30.96 अरब डॉलर रह गया.

चालू खाते का घाटा बढ़कर 57.2 अरब डॉलर हो गया
वित्त वर्ष 2018-19 में देश का चालू खाते का घाटा बढ़कर 57.2 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.1 प्रतिशत हो गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 1.8 प्रतिशत था. चालू खाते में विदेशी मुद्रा के बाह्य प्रवाह और अंत: प्रवाह का अंतर चालू खाते का घाटा कहलाता है.