Upi Dominates Indias Digital Payments With 83 Per Cent Share Says Rbi Report
UPI का जलवा: डिजिटल भुगतान में 83% हिस्सेदारी
RBI रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में UPI की डिजिटल भुगतान में हिस्सेदारी 83% तक पहुंच गई. तेज, सुरक्षित और आसान लेनदेन के कारण यह अन्य भुगतान माध्यमों को पीछे छोड़ते हुए भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहा है.
UPI Payment: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र में सबसे बड़ा खिलाड़ी बन चुका है. 2024 में UPI की हिस्सेदारी बढ़कर 83% हो गई है, जबकि 2019 में यह सिर्फ 34% थी. बीते पांच वर्षों में UPI ने 74% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़त हासिल की है.
अन्य भुगतान माध्यम पीछे छूटे
रिपोर्ट के अनुसार, UPI के मुकाबले अन्य भुगतान माध्यमों की लोकप्रियता घटी है. RTGS, NEFT, IMPS, डेबिट और क्रेडिट कार्ड की कुल हिस्सेदारी 2019 में 66% थी, जो अब घटकर 17% रह गई है. इसका कारण UPI की तेज़, सुरक्षित और आसान भुगतान प्रक्रिया है.
UPI लेनदेन में जबरदस्त उछाल
भारत में UPI लेनदेन की संख्या में बड़ा उछाल देखने को मिला है. 2018 में मात्र 375 करोड़ UPI लेनदेन होते थे, जो 2024 में बढ़कर 17,221 करोड़ तक पहुंच गए. वहीं, लेनदेन का कुल मूल्य 2018 में 5.86 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024 में 246.83 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
पी2पी बनाम पी2एम: कौन आगे?
UPI के माध्यम से दो तरह के लेनदेन होते हैं—पी2पी (Person-to-Person) और पी2एम (Person-to-Merchant).
वॉल्यूम के मामले में पी2एम लेनदेन, पी2पी से आगे निकल चुका है.
मगर लेनदेन के मूल्य में अभी भी पी2पी ट्रांजेक्शन का दबदबा कायम है.
UPI की सफलता के पीछे कारण
UPI की सफलता का बड़ा कारण इसकी सरलता और सुरक्षा है. यह रियल-टाइम भुगतान की सुविधा देता है, जिससे आम लोगों और व्यापारियों को पारंपरिक बैंकिंग तरीकों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. QR कोड, मोबाइल नंबर, वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) जैसे सरल तरीकों से भुगतान संभव है.
भारत में डिजिटल क्रांति जारी
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डिजिटल भुगतान लगातार बढ़ रहा है. 2024 में कुल 208.5 अरब डिजिटल ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए. UPI की सफलता ने भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.
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