नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने मंगलवार को एक संसदीय समिति से कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अधिक कारगर निगरानी के लिए केंद्रीय बैंक को और अधिकारों की जरूरत है. रिजर्व बैंक के गवर्नर वित्त पर संसद की स्थायी समिति के सामने उपस्थित हुए. सूत्रों ने बताया कि पटेल को डूबे कर्ज, बैंक धोखाधड़ी, नकदी संकट और अन्य मुद्दों पर सांसदों के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा. सूत्रों ने बताया कि गवर्नर ने सदस्यों को भरोसा दिलाया कि प्रणाली को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं.

सरकारी बैंकों का घाटा 87,300 करोड़
सरकारी बैंकों के बारे में उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का उन पर अपर्याप्त नियंत्रण है. बैठक में मौजूद सूत्रों ने बताया कि गवर्नर ने समिति से सरकारी बैकों पर नियंत्रण के लिए अधिक अधिकारों की मांग की. भारतीय स्टेट बैंक सहित देश में कुल 21 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं. वित्त वर्ष 2017-18 में सरकारी बैंकों का सामूहिक घाटा 87,300 करोड़ रुपये रहा है. पंजाब नेशनल बैंक को 12,283 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है.

सिर्फ दो बैंकों को हुआ फायदा
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सिर्फ दो बैंक इंडियन बैंक और विजया बैंक को 2017-18 में मुनाफा हुआ है. वित्त वर्ष के दौरान इंडियन बैंक ने 1,258.99 करोड़ रुपये और विजया बैंक ने 727.02 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया. दिसंबर , 2017 के अंत तक पूरे बैंकिंग क्षेत्र की सकल गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 8.31 लाख करोड़ रुपये थीं.

एनपीए के हालात सुधरे
कांग्रेसी नेता वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली इस समिति के कुछ सदस्यों ने पटेल से जानना चाहा कि एटीएम मशीनों में हाल में पैसा की कमी क्यों आ गई थी. कुछ सदस्यों ने पूछा कि बैंकिंग धोखाधड़ी से निपटने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाऐ गए. पटेल ने समिति से कहा कि बैंकिंग व्यवस्था को चाकचौबंद बनाए जाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं. हमें विश्वास है कि हम इस संकट से निकल जाएंगे. पटेल ने समिति को सूचित किया कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून को लागू किए जाने के बाद एनपीए के मामले में हालात सुधरे हैं.

इन मुद्दों पर पूछे गए सवाल
बैठक में सदस्यों ने विभिन्न सरकारी बैंकों की खस्ता हालत , फंसे कर्ज और पंजाब नेशनल बैंक में करीब 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को लेकर चिंता व्यक्त की . समिति के सदस्य और तृणमूल कांग्रेस के नेता दिनेश त्रिवेदी ने सोमवार को कहा था नोटबंदी के बाद कितना पैसा प्रणाली में वापस आया आरबीआई ने अब तक इसकी जानकारी नहीं दी है. और गवर्नर को इसके बारे में समिति को सूचित करना चाहिए. समिति की पिछली बैठक में पटेल से ऋण पुनर्गठन कार्यक्रम के बारे में भी सवाल किए गए थे.