नई दिल्लीः डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत में गिरावट के कारण भले ही पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन देश ही कुछ ऐसी कंपनियां हैं जिनको इस स्थिति का भरपूर फायदा हो रहा है. इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक के सबसे कमजोर स्थिति में पहुंच चुके रुपये के कारण सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां शानदार मुनाफा कमा रही हैं. इनमें से कई कंपनियों के शेयर पिछले 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर हैं.

दरअसल, देश की प्रमुख आईटी कंपनियों का कारोबार सॉफ्टवेयर के निर्यात पर निर्भर है. ऐसे में सेवाओं और सॉफ्टवेयर के निर्यात से उनको जो रकम मिलती है वह डॉलर में होती है, लेकिन रुपये के कमजोर होने से उनकी आय स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है. इस बात को इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि अगर किसी सॉफ्टवेयर कंपनी को निर्यात से 100 डॉलर की कमाई होती है तो भारतीय रुपये में आज की तारीक में उसकी कमाई 7200 रुपये से अधिक हुई जबकि कुछ माह पहले डॉलर के मुकाबले रुपये के भाव करीब 67 रुपये था तब उसकी कमाई 6700 रुपये के करीब बैठती थी.

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक कमजोर होते रुपये के कारण इन कंपनियों का प्राइस-अर्निग रेशियो तीन साल के उच्च स्तर पर है. देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यात करने वाली कंपनी TCS का मासिक प्राइस-अर्निग रेशियो 28.7 रहा जबकि उसका तीन साल का औसत 21.7 है. अन्य आईटी कंपनियां जैसे इंफोसिस और विप्रो का भी प्राइस-अर्निग रेशियो तीन साल के औसत की तुलना में 10 फीसदी अधिक है. मिड साइज की आईटी कंपनी Mindtree का प्राइस-अर्निग रेशियो तीन साल के औसत 21.4 से बढ़कर 29.1 हो गया है. इतना ही नहीं कमजोर होते रुपये के कारण TCS और अन्य कंपनियों की ओर से दिए गए शेयर बाइबैक ऑफर्स भी निवेशकों में खूब लोकप्रिय हो रहे हैं.

गुरुवार को गणेश चतुर्थी के कारण बाजार बंद रहने से पहले बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपये का भाव 72.19 रुपये था, जो इस साल जनवरी से अब तक 11.5 फीसदी कमजोर हो चुका है. कमजोर रुपये के कारण निर्यातकों को फायदा पहुंचा है.