Airbus: क्या है एयरबस A320 की सॉफ्टवेयर क्राइसिस? कंपनी के 6000 प्लेन हुए ग्राउंड, 5 प्वाइंट्स में जानें पूरा मामला

Airbus A32o Software Crisis: 30 अक्टूबर के दिन मेक्सिको से अमेरिका जा रही एयरबस की एक फ्लाइट की ऊंचाई अचानक से धीरे-धीरे कम होने लगी जिसकी वजह से फ्लाइट को बीच रास्ते में लैंडिंग कराना पड़ा. एक्सप्रर्टस ने बताया कि फ्लाइट में ये खराबी सूर्य के रेडिएशन की वजह से हुई है, जिसके बाद एयरबस ने दुनिया भर से अपने 6000 फ्लाइट को ग्राउंड किया है.

Published date india.com Published: November 29, 2025 1:47 PM IST
Airbus A320 software crisis
Airbus A320 software crisis

Airbus A32o Software Crisis: एयरबस ने दुनिया भर मे सेवा दे रहे अपने 6000 प्लेन को ग्राउंड कर लिया है. इस घटना को विमान उड़ान इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉल माना जा रहा है. एयरबस ने यह फैसला विमानों को तत्काल सॉफ्टवेयर फिक्स (Software Fixes) के लिए ग्राउंड किया है. एय़रबस का ये फैसला 30 अक्टूबर के दिन हुई फ्लाइट में गड़बड़ी को लेकर आया है. जब वैज्ञानिकों ने बताया कि तीव्र सौर विकिरण (Intense Solar Radiation) विमान के महत्वपूर्ण फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम के डेटा को प्रभावित कर सकता है. इसी समस्या से निपटने के लिए एयरबस ने ये फैसला लिया है.

कैसे शुरू हुआ मामला?

घटना 30 अक्टूबर के दिन की है. JetBlue नामक फ्लाइट मेक्सिको से अमेरिका के लिए उड़ान भरी. उड़ान के दौरान फ्लाइट की ऊंचाई धीरे-धीरे कम होने लगी. अचानक से दिखे इस घटना की वजह से प्लेन को टाम्पा नामक जगह पर इमरजेंसी लैंडिग करवानी पड़ी. एक्सपर्ट्स ने जांच करने के बाद बताया कि इस घटना के पीछे तेज रेडिएशन है. तेज सोलर रेडिएशन ने ELAC नामक फ्लाइट के कंट्रोल डेटा में खराबी उत्पन्न कर दिया था. इस घटना के बाद Airbus ने अलर्ट जारी किया है. इसके बाद ही Airbus ने अपने अपने 6000 प्लेन को ग्राउंड कर लिया है.

5 प्वाइंट्स में जानें पूरा मामला

  1. सूर्य की रौशनी से रेडिएशन निकलता है. ये रेडिएशन के कण हाई टेक, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, सैटेलाइट,नेविगेशन और विमान के कंट्रोल के डेटा को प्रभावित कर सकते हैं. रेडिएशन के कण सॉफ्टवेयर के वर्किंग को भी इंफ्लूएंश करते हैं, जिससे डेटा सिग्नल में बदलवा दिख सकते हैं. परिणामत: रेडिशन के कणों के असर से कंप्यूटर गलत सिग्नल पढ़ सकता. और गलत सिग्नल की वजह से बड़ी दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी हुई रहती है.
  2. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, सूर्य से निकलने वाले कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कण की ज्यादा मात्रा 28,000 किमी के ऊपर उड़ रहे प्लेन के इलेक्ट्रॉनिक और सैटेलाइट सिग्नल को इफेक्ट कर असल मैसेज में छेड़छाड़ करने में सक्षम है.
  3. A320 में ELAC 1 और ELAC 2 नाम के दो मुख्य कंप्यूटर होते हैं. ये सिस्टम पारंपरिक मैकेनिकल केबलों के बजाय इलेक्ट्रिकल सिग्नल का उपयोग करके कॉकपिट से कंट्रोल सर्फेस तक इनपुट भेजते हैं, जिससे सटीक और कुशल उड़ान सुनिश्चित होती है. साथ ही पायलट के कमांड को विमान के दो सबसे जरूरी कंट्रोल सर्फेस- एलिवेटर (ऊपर-नीचे जाने के लिए/पिच) और आईलेरॉन (दाएं-बाएं मुड़ने के लिए/रोल) का कंट्रोल देना है.
  4. ELAC की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विमान में पहले से प्रोग्राम किए गए फ्लाइट कंट्रोल कानूनों को लागू करना है. ये कानून विमान को सुरक्षित तरीके से प्रतिक्रिया देने की गारंटी देते हैं, जिससे पायलट ऑपरेशनल लिमिट (जैसे ओवरस्पीड) से बाहर जाकर उड़ान ना भर सकें. वहीं, यदि ELAC 1 काम करना बंद कर दे, तो ELAC 2 तुरंत कमान संभाल लेता है. यह सिस्टम लगातार सभी कंट्रोल सर्फेस पर नजर रखता है और किसी भी खराबी आने पर वार्निंग जारी करता है.
  5. एयरबस अपने 6000 प्लेन को ग्राउंड करने के बाद उनके सॉफ्टवेयर और उसके अनुसार, हॉर्डवेयर को अपडेट करना है. पुराने फ्लाइट को अपडेट करने में थोड़ा ज्यादा समय लगेगा.

एयर इंडिया और इंडिगो ने भी जारी की चेतावनी

Airbus के ऐसा करने के बाद इंडिगो (IndiGo) और एयर इंडिया (Air India) दोनों ने यात्रियों को बड़े पैमाने पर देरी और संभावित कैंसिलेशन की चेतावनी जारी कर दी है, क्योंकि उनके भी लगभग 350 A320 विमान प्रभावित हुए हैं.

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