100 दिन तक चली इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग तो कितना बिगड़ जाएगा आपके घर का बजट, आंकड़ों से खुद ही लगा लें हिसाब

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:March 5, 2026 5:36 PM IST

ईरान का होर्मुज रूट के बंद होने से दुनिया के कई देशों की तेल सप्लाई पर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें भारत समेत एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर होगा. इस रूट के बंद होने कारण ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं.

अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग का गुरुवार (5 मार्च) को छठा दिन है. इजरायल-अमेरिका ने 28 फरवरी (शनिवार) को ईरान के खिलाफ हमले शुरू किए थे. ईरान की सरकारी एजेंसी के मुताबिक, अब तक ईरान में 1300 से ज्यादा हमले दर्ज किए गए हैं. इनमें 1000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. 174 शहर इन हमलों से प्रभावित हुए हैं. ईरान भी पूरी ताकत से पलटवार कर रहा है. मिडिल ईस्ट में चल रही इस जंग का असर अब ग्लोबल सप्लाई चेन पर भी दिखने लगा है.

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बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग के 4-5 हफ्ते तक चलने की बात कही थी. लेकिन, मौजूदा स्थिति को देखने से लगता है कि ये जंग लंबी चलेगी. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग अगले 100 दिनों तक चलती है, तो इससे आपके घर का बजट कैसे बिगड़ जाएगा? आइए जानते हैं अगर ये जंग 100 दिन तक चली, तो कच्चे तेल के दामों पर कितना असर होगा? नेचुरल गैस की सप्लाई का क्या होगा? एविएशन सेक्टर को कितना नुकसान पहुंचेगा? युद्ध का इंडियन रेमिटेंस पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

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कितनी बढ़ जाएगी कच्चे तेल की कीमत?

इजरायल-अमेरिका और ईरान की जंग का असर कमोडिटी प्राइस पर दिखाई देने लगा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल 100 डॉलर की तरफ बड़ रहा है. वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) में भी क्रूड ऑयल 77 डॉलर के ऊपर कारोबार कर रहा है, जबकि ब्रेंट का भाव 84 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा. अगर तेल के दाम 100 डॉलर के पार हो जाता है, तो भारत में आपको पेट्रोल-डीजल के लिए ज्यादा कीमत देनी होगी. अनुमान के मुताबिक, दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये और डीजल के दाम 100 रुपये तक जा सकते हैं.

नेचुरल गैस

बाजार को US-ईरान की जंग लंबी चलने की आशंका है. लिहाजा नेचुरल गैस भी तैश में है. US में गैस वायदा $3/MMBtu तक पहुंच गया है. कतर ने LNG प्लांट को फिलहाल बंद कर दिया है. वहीं, ईरान ने भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है. इसलिए सप्लाई गिर गई है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि एक हफ्ते में US में नेचुरल गैस की कीमतों में 6% की तेजी आई है. एक महीने में इसमें 13% का दबाव हुआ है. वहीं, यूरोप में एक हफ्ते में नेचुरल गैस में 61%, ब्रिटेन में 71% और MCX पर 64% की बढ़त देखने को मिली है. इसलिए शुरुआती एक हफ्ते में यूरोप में नेचुरल गैस की कीमतों में 48% का उछाल आया है. इसलिए भारत में भी नेचुरल गैस की कीमतों में देर-सबेर इजाफा होगा ही.

एल्यूमीनियम भी हो रहा महंगा

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट बताती है कि LME पर एल्यूमीनियम के भाव 4 साल की ऊंचाई पर पहुंचा है. कतर ने QatarEnergy में LNG प्लांट बंद कर दिया है. इससे Qatalum का प्रोडक्शन पूरी तरह रुका है. Qatalum की सरकारी एल्यूमीनियम कंपनी और Norsk Hydro का JV है. वहीं, एल्यूमीनियम बहरीन ने शिपमेंट्स पर force majeure का ऐलान किया है. बहरीन, कतर, सऊदी अरब, UAE में ईरान के रास्ते एल्यूमीनियम की आवाजाही होती है.

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भारत के पास कितना स्टॉक?

भारत सरकार ने मंगलवार को कहा कि देश के पास 25 दिनों का क्रूड ऑयल और 25 दिनों का पेट्रोल-डीजल का स्टॉक है. कुल मिलाकर 8 हफ्ते का क्रूड ऑयल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का भंडार हमारे देश में मौजूद है. LPG और LNG के मामले में भी भारत अभी अच्छी स्थिति में बताया जा रहा है.

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया को मौजूदा हालात में देश की तैयारियों के बारे में जानकारी दी थी. पुरी ने बताया, "भारत दुनिया भर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है. मिडिल ईस्ट से होने वाली शॉर्ट-टर्म दिक्कतों से निपटने के लिए देश में क्रूड ऑयल और पेट्रोल, डीज़ल और ATF जैसे ज़रूरी पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का अच्छा स्टॉक है."

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युद्ध का इंडियन रेमिटेंस पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

इजरायल-ईरान की जंग में भारत में विदेशी कामगारों की ओर से भेजे जाने वाले पैसों (रेमिटेंस) में बड़ी रुकावट आने की संभावना कम है. जानकारों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कुल रेमिटेंस में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी कम हुई है. फिलहाल कुल रेमिटेंस में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 20.5% है. इसके बाद केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना, कर्नाटक और फिर आंध्र प्रदेश आता है.

किन देशों से आता है सबसे ज्यादा रेमिटेंस?

भारत में सबसे ज्यादा रेमिटेंस(विदेशों से पैसे भेजना) अमेरिका से आता है. अमेरिका से 27.7% रेमिटेंस आता है. इससे पहले पश्चिम एशिया का नंबर था. एक्सपर्ट रेमिटेंस में कम असर पड़ने के लिए दो तर्क दे रहे हैं. पहला- उन्होंने उम्मीद जताई कि खाड़ी सहयोग परिषद देशों के आसपास बढ़ा तनाव कम समय के लिए होगा. दूसरा- भारत में आने वाले रेमिटेंस में अमेरिका का हिस्सा ज्यादा है. इसलिए इसपर कोई असर नहीं होगा.

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