नई दिल्ली: प्याज के निर्यात पर केंद्र सरकार ने रोक लगा दी है. किसान इस फैसले को लेकर गुस्से में हैं. किसानों ने इसे लेकर देश भर में प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है. आज महाराष्ट्र के नासिक जिले के लासलगांव और इसके आसपास के कुछ इलाकों में किसानों ने इस फैसले के खिलाफ सड़कों उतरकर प्रदर्शन किया. नासिक को दुनिया की सबसे बड़ी प्याज मंडियों में शुमार किया जाता है. अधिकारियों ने बताया कि किसानों ने मुंगसे, पिंपलगांव, नामपुर और उमराने बाजारों में प्रदर्शन किया. इस दौरान किसानों ने लगभग 10 हजार क्विंटल प्याज के लिये लगाई जा रही बोली रोक दी. साथ ही उन्होंने मुंबई-आगरा हाईवे समेत कई मार्गों पर यातायात रोकने का भी प्रयास किया. Also Read - कृषक विधेयक: आखिर क्या चाहते हैं किसान? यहां जानिए MSP को लेकर किसानों की शंकाएं और मांगें

बता दें कि सरकार ने देश में प्याज की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की बात कहते हुए प्याज के विदेशों में निर्यात पर रोक लगा दी, लेकिन वहीं किसानों का कहना है कि उन्हें अभी थोड़ा मुनाफा मिल रहा था, लेकिन प्याज का निर्यात रोके जाने से अचानक कीमतों में गिरावट आई और उनके मुनाफे में बड़ी कमी आ गई है. Also Read - राज्यसभा में दोनों कृषि विधेयक पास, पीएम मोदी बोले- अन्नदाताओं को आजादी मिली, जारी रहेगी सरकारी खरीद

आज एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव की कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) में सुबह 2,220 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से प्याज की बोली लगनी शुरू हुई, जिससे किसान नाराज हो गए. उन्होंने दावा किया कि प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगने से घरेलू बाजार में इसके दाम गिर गए हैं. Also Read - पूर्व सीएम देवेंद्र फडनवीस भी प्याज के निर्यात पर रोक के पक्ष में नहीं, केंद्रीय मंत्री से कहा- किसान दुखी हैं

प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि सोमवार को प्याज के न्यूनतम दाम 1,100 रुपये, अधिकतम 3,209 रुपये और औसत 2,950 रुपये प्रति क्विंटल थे, जो निर्यात पर पाबंदी का फैसला लेने के कुछ ही घंटे बाद गिरकर 2,700 रह गए. केन्द्र सरकार ने सोमवार को सभी किस्म की प्याज के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी थी. इसका मकसद उपलब्धता बढ़ाना और घरेलू बाजार में प्याज के दामों पर अंकुश लगाना है.