नई दिल्ली। देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के सीईओ-एमडी विशाल सिक्का ने इस्तीफा दे दिया है. उनकी जगह प्रवीण राव को अंतरिम सीईओ-एमडी बनाया गया है और विशाल सिक्का को कंपनी के एक्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन के पद पर नियुक्त किया गया है. विशाल सिक्का के इस्तीफे की वजहों पर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि नारायण मूर्ति समेत अन्य फाउंडर्स ने विशाल सिक्का समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों को कंपनी से मिल रही सैलरी और हर्जाने पर सवाल खड़ा कर इंफोसिस बोर्ड के सामने सवाल खड़ा कर दिया था. इन्हीं मतभेदों के चलते विशाल सिक्का ने इस्तीफा दे दिया. Also Read - अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से दिया इस्तीफा, कहा- अब मेरी जवाबदेही नहीं

इंफोसिस के इस विवाद की जड़ में पूर्व चीफ फाइनेंनशियल ऑफिसर राजीव बंसल को दिया गया हर्जाना भत्ता है. बंसल को कंपनी ने 24 महीने की सैलरी कंपनी छोड़ते वक्त दी थी. इस रकम पर सेबी ने सवाल उठाया था जिसके बाद नारायण मूर्ति समेत अन्य फाउंडर्स ने विशाल सिक्का समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों को कंपनी से मिल रही सैलरी और हर्जाने पर सवाल खड़ा कर इंफोसिस बोर्ड के सामने सवाल खड़ा कर दिया था. Also Read - कोरोना मरीजों के इलाज में लगी ड्यूटी तो डॉक्टर दंपति ने दिया इस्तीफा, मिला 24 घंटे का अल्टीमेटम

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इंफोसिस के संस्थापकों और निदेशक मंडल के बीच पिछले कई महीनों से जारी विवाद फरवरी में खुलकर सामने आया था. उस वक्त नारायण मूर्ति ने कहा था, ‘मैं यह साफ कर देना चाहता हूं कि प्रबंधन मुझे चिंतित नहीं कर रहा है. मुझे लगता है कि हम सीईओ सिक्का से खुश हैं. वह अच्छा काम कर रहे हैं. हालांकि हममें से कुछ जैसे कि संस्थापकों, वरिष्ठों तथा इंफोसिस से पूर्व में जुड़े रहे लोगों को यह बात चिंतित कर रही है कि कामकाज के संचालन यानी गवर्नेंस की कुछ चीजें ऐसी हैं जो बेहतर हो सकती थीं.’

गौरतलब है कि विशाल सिक्का का पिछले साल वेतन और बोनस के रूप में 48.7 करोड़ रुपये दिए गए. वहीं 2015 में उनका मूल वेतन 4.5 करो़ड़ रुपये था. वेतन में इस अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी पर नारायणमूर्ति समेत दो अन्य संस्थापक सदस्यों ने बोर्ड मेंबर को पत्र लिखा था. मूर्ति ने पूर्व सीएफओ राजीव बंसल को कंपनी से अलग होने के लिए 24 माह के पैकेज के रूप में 23 करोड़ रुपये दिए जाने पर भी सवाल उठाया था.