
Manoj Yadav
'बिजनेस' की खबरों में खास रुचि रखने वाले मनोज यादव को 'पॉलिटिकल' खबरों से भी गहरा लगाव है. ये इंडिया.कॉम हिंदी के बिजनेस डेस्क पर कार्यरत हैं. इनके पास ... और पढ़ें
Why Stock Market Crash Today on 12 FEB: बुधवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए अच्छी नहीं रही. बाजार खुलते ही भारी गिरावट देखने को मिली और चौतरफा बिकवाली का दबाव बना रहा. शुरुआती सत्र में सेंसेक्स 428 अंक या 0.56% टूटकर 75,864 पर और निफ्टी 130 अंक या 0.51% की कमजोरी के साथ 22,958 पर कारोबार कर रहा था.
बिकवाली का सबसे बड़ा असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर पड़ा. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 904 अंक यानी 1.78% गिरकर 49,983 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 341 अंक यानी 2.18% की गिरावट के साथ 15,728 पर कारोबार कर रहा था. यह दर्शाता है कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है.
बाजार में सबसे ज्यादा बिकवाली रियल एस्टेट सेक्टर में देखी गई, जहां निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 2% से अधिक टूट गया. इसके अलावा, ऑटो, फार्मा, मीडिया, एनर्जी और इंफ्रा सेक्टर में भी 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. हालाँकि, आईटी सेक्टर ने मजबूती दिखाई और हरे निशान में कारोबार करता रहा.
बाजार की धारणा पूरी तरह से नकारात्मक बनी हुई है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के अनुसार, 338 शेयरों में तेजी जबकि 1,977 शेयरों में गिरावट देखी गई. यह स्पष्ट संकेत है कि बिकवाली का दबाव ज्यादा है और निवेशकों में घबराहट बढ़ रही है.
सेंसेक्स पैक में टीसीएस, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, एचयूएल, सन फार्मा, बजाज फिनसर्व और आईसीआईसीआई बैंक टॉप गेनर्स में शामिल रहे. वहीं, एमएंडएम, जोमैटो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडसइंड बैंक, एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, अदाणी पोर्ट्स, आईटीसी, एशियन पेंट्स और एनटीपीसी सबसे ज्यादा गिरने वाले स्टॉक्स में शामिल थे.
दिलचस्प बात यह रही कि भारतीय बाजार में बिकवाली के दबाव के बावजूद, एशियाई बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला. टोक्यो, बैंकॉक, सियोल, हांगकांग और जकार्ता के बाजार बढ़त में कारोबार कर रहे थे, जबकि शंघाई के बाजार सपाट बने रहे.
वैश्विक बाजारों से मिले संकेतों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में कमजोरी जारी रही. ब्रेंट क्रूड 0.32% गिरकर 76.75 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.35% गिरकर 73.06 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. इससे ऊर्जा शेयरों पर भी दबाव बना रहा.
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बिकवाली का सिलसिला जारी है. मंगलवार को एफआईआई ने 4,486 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 4,001 करोड़ रुपये की खरीदारी की. यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशकों का बाजार से भरोसा कम हो रहा है.
इस गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक अस्थिरता, एफआईआई की बिकवाली और घरेलू बाजार में सेक्टोरल दबाव माना जा रहा है. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी गिरावट से रिटेल निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है. बाजार की मौजूदा स्थिति में सतर्कता और लॉन्ग टर्म निवेश की रणनीति अपनाना बेहतर होगा.
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