ZEE के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा ने ZEEL-SONY मर्जर को लेकर Invesco के मकसद पर उठाए सवाल

ZEEL-SONY Merger: इनवेस्को के पास न ठोस बोर्ड का प्रस्ताव है और न ही एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कामकाज का तजुर्बा. सवाल ये है कि फिर इनवेस्को की मंशा क्या है?

Published date india.com Updated: October 5, 2021 4:58 PM IST
ZEE के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा ने ZEEL-SONY मर्जर को लेकर Invesco के मकसद पर उठाए सवाल

ZEEL-SONY Merger: जी एंटरटेनमेंट (ZEEL) के साथ सोनी पिक्चर्स (SPNI) के मर्जर के ऐलान का इंडस्ट्री ने स्वागत किया. शेयर बाजार भी खुश हुआ. शेयरहोल्डर में भी भरोसा है. लेकिन, इनवेस्को अब भी जी एंटरटेनमेंट के बोर्ड को बदलने की जिद पर अड़ा है. इस मामले में कुछ मीडिया संस्थान उल्टा Zee से सवाल कर रहे हैं. उनका मानना है कि जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज को सवालों के जवाब देने चाहिए. लेकिन, ऐसी खबरें बेबुनियाद हैं, क्योंकि, ZEEL ने SONY के साथ डील करके शेयरधारकों के सामने अपना प्लान पेश कर दिया है. इंडस्ट्री के सामने भी क्लैरिटी है. वहीं, इन्वेस्को की मंशा पर लगातार सवाल उठ रहे हैं. उसके पीछे किसका हाथ है? इस सवाल से इन्वेस्को भाग क्यों रहा है?

डील में अड़ंगा क्यों लगा रहा है इन्वेस्को?
जी एंटरटेनमेंट के मामले में इनवेस्को खुद सवालों के घेरे में फंसता दिख रहा है. क्योंकि, इनवेस्को के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि आखिर वो किसके इशारे पर काम कर रहा है? आखिर अच्छी भली डील में अड़ंगा लगावने की कोशिश क्यों की जा रही है? आखिर इनवेस्को किसका मोहरा बनकर निवेशकों को गुमराह कर रहा है? ऐसे ढेरों सवाल हैं जो इनवेस्को को लेकर उठ रहे हैं. इन्वेस्को ने पूरे मामले में पारदर्शिता रखी ही नहीं है. ZEEL-SONY मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी में भी पुनीत गोयनका MD-CEO होंगे. ये भरोसा सोनी पिक्सचर्स नेटवर्क इंडिया ने भी जताया है. लेकिन, इन्वेस्को को ये बात क्यों खटक रही है? इन्वेस्को मैनेजमेंट में किसे रखेगी ये क्यों नहीं बताती?

ठोस बोर्ड नहीं तो क्यों बदलाव चाहता है इन्वेस्को?
इनवेस्को के पास न ठोस बोर्ड का प्रस्ताव है और न ही एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कामकाज का तजुर्बा. सवाल ये है कि फिर इनवेस्को की मंशा क्या है? एक तरफ जी एंटरटेनमेंट के मौजूदा बोर्ड में अलग-अलग सेक्टर के अनुभवी और जाने माने नाम शामिल हैं. वहीं, दूसरी तरफ इनवेस्को के बोर्ड में ऐसा कोई नाम नहीं है, जिसके पास मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर का कोई बड़ा अनुभव है. तो किस आधार पर इनका नाम रखा गया है? इन्वेस्को को पारदर्शिता के साथ सामने आना चाहिए.

सुभाष चंद्रा के इन्वेस्को से सवाल
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा (Dr. Subhash Chandra – Founder, Zee Entertainment Enterprises Limited) ने इस मामले पर एक वीडियो बयान जारी किया है. उन्होंने कहा- “ZEEL के बारे में जो भी सवाल हैं उस पर इतना ही कहना जरूरी है कि चाहे इस कंपनी को पुनीत गोयनका चलाएं, चाहे कोई और चलाए. कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जो इसे आगे बढ़ा सके और शेयरधारकों को भी इसका फायदा मिले. पिछले करीब 30 साल में मैंने इस कंपनी को खून-पसीने से सींचा है. क्योंकि, आज मुझे इससे कोई फायदा होगा, न नुकसान होगा. ये इंटरव्यू मैं CNBC, मनी कंट्रोल के साथियों को भी देना चाहता था. लेकिन, वो लेंगे नहीं और चलाएंगे भी नहीं. क्योंकि, उनका भी इसमें कोई निजी फायदा दिखाई पड़ता है.” ZEEL के बारे में जो भी सवाल है मैं तो आपको इतना ही कहूंगा कि चाहे इस कंपनी को पुनीत गोयनका चलाएं, चाहे कोई और चलाए. कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिये जिसके हाथों में ये कंपनी जिसको मैंने अपने और मेरे बहुत से साथियों ने पिछले लगभग 30 सालों से खून और पसीने से सींचा है वो आगे बढ़े, प्रॉस्पर करे और इसके शेयर होल्डर को भी उसका फायदा मिले. क्योंकि आज मुझे इससे ना लाभ होगा ना हानि. ये इंटरव्यू मैं अवश्य CNBC के अपने साथियों को, मनी कंट्रोल के साथियों को भी देना चाहता था, लेकिन, वो लेंगे नहीं और चलाएंगे भी नहीं. क्योंकि, उनका भी इसमें कोई निजी फायदा दिखाई पड़ता है.जो भी हो भगवान उनको भी सुबुद्धि दें.’

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने कहा कि इन्वेस्को बड़े अच्छे इन्वेस्टर हैं, लेकिन इस ZEE के केस में वो ट्रांसपैरेंटली ये नहीं बता रहे हैं कि वो इसको लेकर करेंगे क्या, किसको मैनेजमेंट देंगे? पुनीत गोयनका को तो हटा देंगे, चला हटा दो, फिर किसको दोगे? क्या आपने कोई डील किसी के साथ कर रखी है? ये जो 6 डायरेक्टर उन्होंने बताए हैं उनका बैकग्राउंड क्या है? कहीं उनका किसी एक कंपनी के साथ संबंध है क्या? वो कोई लेना चाहते हैं क्या? तो इन्वेस्को को पारदर्शिता से और खुलकर सामने आना चाहिये और फिर शेयर होल्डर्स को तय करने देना चाहिये कि वो इन्वेस्को की डील के साथ जाना चाहते हैं या SONY की डील के साथ जाना चाहते हैं. रेगुलेटर्स से जुड़े सवाल की बात करें तो मैं कहना चाहता हूं कि रेगुलेटर की पहली प्राथमिकता होती है कि माइनॉरिटी शेयर होल्डर्स के हितों की रक्षा की जाए. इसीलिये उन्हें इन्वेस्को से भी पूछना चाहिये कि उसे पारदर्शिता के साथ सामने आना चाहिये. ये सुनिश्चित करना चाहिये कि माइनॉरिटी शेयर होल्डर्स के हाथ में दोनों चीज़ होनी चाहिये कि वो इन्वेस्को डील के साथ वोट करना चाहते हैं या SONY डील के साथ?

रेगुलेटर्स को भी पूछना चाहिए इन्वेस्को से सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स में सवाल उठाया गया कि रेगुलेटर्स ZEEL से सवाल क्यों नहीं पूछ रहा है. इसके जवाब में सुभाष चंद्रा ने कहा- “रेगुलेटर्स पहली जिम्मेदारी माइनॉरिटी शेयरहोल्डर के हितों की रक्षा करना है. उन्हें भी इन्वेस्को से सवाल करना चाहिए कि वो इस मामले में पारदर्शिता रखे. छोटे शेयरधारकों को यह तय करने दें कि वो ZEEL-SONY डील के साथ जाना चाहते हैं या फिर इन्वेस्को के प्लान के साथ, जो अभी तक सामने नहीं रखा गया है.”

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