ZEEL-Invesco Case: ज़ी एंटरटेनमेंट को हथियाने की कोशिश में जुटे इन्वेस्को को मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा और ज़ी एंटरटेनमेंट के लिए अच्छी खबर आयी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने Invesco की ओर से EGM बुलाने की मांग को खारिज करते हुए फिलहाल EGM पर रोक लगा दी है. गौरतलब है कि इन्वेस्को लगातार EGM बुलाने की मांग पर अड़ा हुआ था. ज़ी एंटरटेनमेंट ने EGM बुलाने की मांग को चुनौती देते हुए इसे गैरकानूनी और अवैध बताया था. ज़ी एंटरटेनमेंट के पक्ष को बॉम्बे हाईकोर्ट ने समझा और मामले की सुनवाई करते हुए इन्वेस्को की मांग को खारिज कर दिया.Also Read - ZEEL-Invesco Case: 'पद की नहीं कंपनी के भविष्य की चिंता', पुनीत गोयनका बोले- 'ZEE को बचाने के लिए लड़ता रहूंगा'

इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने Zee बोर्ड को एक्सट्रा ऑर्डिनरी मीटिंग बुलाने की सलाह दी थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर को इस मामले पर सुनवाई की थी. बता दें कि कंपनी के शेयरहोल्डर इन्वेस्को डेवलपिंग मार्केट फंड्स और OFI ग्लोबल चाइना फंड ने ईजीएम मीटिंग बुलाने की मांग रखी थी. बॉम्बे हाईकोर्ट ने EGM में पारित प्रस्ताव को तब तक सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था, जब तक ईजीएम बुलाने की मांग वैध है या नहीं, इस पर फैसला नहीं हो जाता. अब कोर्ट ने EGM बुलाने की मांग को फिलहाल खारिज करके रूख स्पष्ट कर दिया है. Also Read - ZEEL-Invesco: RIL का अहम बयान- Zee के साथ मर्जर की थी तैयारी, पुनीत गोयनका को ही MD और CEO बनाने का था प्रस्ताव

ज़ी एंटरटेनमेंट में इन्वेस्को और OFI ग्लोबल चाइना की हिस्सेदारी 18 फीसदी है. दोनों कंपनियों ने हाल ही में कंपनी की ईजीएम बुलाने की मांग की थी. गौरतलब है कि MD और CEO के अलावा निदेशक अशोक कुरियन और मनीष चोखानी को हटाने के लिए इन्वेस्को ने ईजीएम बुलाने की मांग की थी. कुरियन और चोखानी पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं. इन्वेस्को ने 6 नए निदेशकों की नियुक्ति करने की भी मांग की थी, लेकिन जिन लोगों की नियुक्ति की मांग की जा रही थी, उनका एंटरटेनमेंट और मीडिया इंडस्ट्री से कोई ताल्लुक नहीं है. Also Read - ZEEL-Invesco Case: इन्वेस्को के फरेब का पर्दाफाश, पुनीत गोयनका ने बोर्ड के सामने खोली पोल; पढ़िए पूरा लेटर

बता दें, इन्वेस्को ZEEL पर कंट्रोल को लेकर जिद पर अड़ा है. Invesco ने ZEEL को रिलायंस ग्रुप के साथ सौदा करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की थी. हालांकि, शेयरहोल्डर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए ज़ी ने सौदा करने से इनकार कर दिया था. दरअसल, रिलायंस की जिन कंपनियों का ZEE के साथ विलय करने की बात रखी गई थी, उनकी वैल्यूएशन को करीब 10,000 करोड़ रुपये बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया था.