#DeshKaZee: ZEEL-Sony डील के खिलाफ चीन की बड़ी साजिश, कॉरपोरेट घराने के हाथ Invesco का रिमोट, समझें पूरी कहानी

Zee Entertainment के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने इस पर इन्वेस्को से सवाल किए हैं. चीन की साजिश नाकाम करने के लिए देशहित में सबको साथ आना होगा. #DeshKaZee पर ट्वीट कर आप भी चीन के खिलाफ इस मुहिम में हिस्सा बन सकते हैं.

Published date india.com Updated: October 6, 2021 12:39 PM IST
#DeshKaZee: ZEEL-Sony डील के खिलाफ चीन ने रची बड़ी साजिश, Invesco का रिमोट कॉरपोरेट घराने के हाथ, समझें पूरी कहानी

ZEEL-SONY Merger: ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) के मामले में इन्वेस्को खुद सवालों के घेरे में फंसता दिख रहा है. क्योंकि, इन्वेस्को के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि आखिर वो किसके इशारे पर काम कर रहा है. लेकिन, ZEEL के खिलाफ साजिश के पीछे चीन का हाथ होने का इशारा मिला है. इन्वेस्को सिर्फ मोहरा है, जो निवेशकों को गुमराह करने के लिए बनाया गया है. चीन के जरिए कोई बड़ा कॉरपोरेट घराना ZEEL को कब्जाना चाहता है.

#DeshKaZee के साथ चीन के खिलाफ मुहिम
इन्वेस्को SONY पिक्चर्स के साथ अच्छी भली डील में अड़ंगा लगाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन, सवाल ये है आखिर इन्वेस्को किसका मोहरा है? ऐसे ढ़ेरों सवाल हैं जो इनवेस्को को लेकर उठ रहे हैं. खुद Zee Entertainment के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा ने इस पर इन्वेस्को से सवाल किए हैं. चीन की साजिश नाकाम करने के लिए देशहित में सबको साथ आना होगा. #DeshKaZee पर ट्वीट कर आप भी चीन के खिलाफ इस मुहिम में हिस्सा बन सकते हैं.

ठोस बोर्ड नहीं तो क्यों बदलाव चाहता है इन्वेस्को?
इन्वेस्को के पास न ठोस बोर्ड का प्रस्ताव है और न ही एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कामकाज का तजुर्बा. सवाल ये है कि फिर इन्वेस्को की मंशा क्या है? एक तरफ ज़ी एंटरटेनमेंट के मौजूदा बोर्ड में अलग-अलग सेक्टर के अनुभवी और जाने माने नाम शामिल हैं. वहीं, दूसरी तरफ इन्वेस्को के बोर्ड में ऐसा कोई नाम नहीं है, जिसके पास मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर का कोई बड़ा अनुभव है. तो किस आधार पर इनका नाम रखा गया है? इन्वेस्को को पारदर्शिता के साथ सामने आना चाहिए.

डॉ. सुभाष चंद्रा ने उठाए सवाल
ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइसेज लिमिटेड के फाउंडर डॉ. सुभाष चंद्रा (Dr. Subhash Chandra – Founder, Zee Entertainment Enterprises Limited) ने इस मामले पर एक वीडियो बयान जारी किया है. उन्होंने कहा- “ZEEL के बारे में जो भी सवाल हैं उस पर इतना ही कहना जरूरी है कि चाहे इस कंपनी को पुनीत गोयनका चलाएं, चाहे कोई और चलाए. कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए, जो इसे आगे बढ़ा सके और शेयरधारकों को भी इसका फायदा मिले. पिछले करीब 30 साल में मैंने इस कंपनी को खून-पसीने से सींचा है. क्योंकि, आज मुझे इससे कोई फायदा होगा, न नुकसान होगा. ये इंटरव्यू मैं CNBC, मनी कंट्रोल के साथियों को भी देना चाहता था. लेकिन, वो लेंगे नहीं और चलाएंगे भी नहीं. क्योंकि, उनका भी इसमें कोई निजी फायदा दिखाई पड़ता है.”

‘इन्वेस्को के पास ठोस प्लान नहीं, निवेशकों को गुमराह करने की कोशिश’
सुभाष चंद्रा ने कहा “इन्वेस्को बड़े अच्छे इन्वेस्टर हैं. लेकिन, ZEEL के मामले में वो ट्रांसपेरेंटली ये नहीं बता रहे हैं, इसको लेकर वो करेंगे क्या. मैनेजमेंट किसके हाथ में देंगे. पुनीत गोयनका को हटाना चाहते हैं तो हटा दें लेकिन, मैनेजमेंट किसके हाथ में देंगे वो बताते क्यों नहीं. क्या इन्वेस्को ने किसी से डील कर रखी है. बोर्ड में 6 डायरेक्टर के नाम का प्रस्ताव दिया है उनका बैकग्राउंड क्या है? क्या उनका किसी X कंपनी के साथ संबंध है? कोई इसे लेना चाहते हैं क्या? इन्वेस्को को इस पर खुलकर सामने आना चाहिए. फिर शेयरधारकों को तय करने दें कि क्या वो इन्वेस्को के साथ जाना चाहेंगे या ZEEL-SONY डील के साथ.

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इनवेस्को से बड़े सवाल?
1. इन्वेस्को आखिर किसके इशारे पर काम रहा है?
2. इन्वेस्को के पीछे आखिर कौन कर रहा साजिश?
3. निवेशकों के हितों के खिलाफ क्यों है इनवेस्को?
4. किसी कॉरपोरेट घराने की कठपुतली है इन्वेस्को?
5. बिना तजुर्बे वाले बोर्ड मेंबर्स का प्रस्ताव क्यों दिया?
6. इन्वेस्को को सिर्फ 18% की चिंता बाकी का क्या?
7. जब खुद का कोई प्लान नहीं तो फिर अड़ंगा क्यों?
8. इन्वेस्को फाइनेंशियल इन्वेस्टर है या स्ट्रैटेजिक?

किसी कॉरपोरेट घराने के इशारे पर इन्वेस्को
ZEEL के बोर्ड में बदलाव की मांग पर इन्वेस्को अड़ा है. हालांकि, बोर्ड में अनुभवहीन सदस्यों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है. अब ये किसके इशारे पर हो रहा है, इसको लेकर इन्वेस्को की तरफ से कोई ट्रांसपेरेंसी नहीं रखी गई है. पुनीत गोयनका को MD-CEO से हटाना चाहता है, लेकिन ये नहीं बताता कि मैनेजमेंट को किसके हाथ में देगा. इन्वेस्को की इस मंशा से साफ झलकता है कि वो किसी बड़े कॉरपोरेट घराने के इशारे पर ZEEL पर कब्ज़ा करना चाहता है.

क्या है ZEEL – सोनी पिक्चर्स की डील
22 सितंबर को ZEEL- सोनी पिक्चर्स के विलय का ऐलान हुआ. इस ऐलान के बाद बाजार भी खुश हुआ और इंडस्ट्री के दिग्गजों ने भी इसको गेमचेंजर बताया. विलय के बाद बनने वाली कंपनी में ZEEL की हिस्सेदारी 47.07% होगी. वहीं, सोनी पिक्चर्स की हिस्सेदारी 52.93% होगी. सोनी ने भी विलय के बाद भी पुनीत गोयनका को ही MD और CEO बनाए रखने पर सहमति जताई है. सोनी नई कंपनी में 1.57 अरब डॉलर का निवेश करेगा.

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