69,000 Assistant Teacher Recruitment 2020: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2019 में हुई सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन फार्म में गलत प्रविष्टियों को सुधारने की अनुमति देने का राज्य सरकार को निर्देश पारित करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है. यह परीक्षा उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापक के 69,000 पदों पर चयन के लिए छह जनवरी, 2019 को आयोजित की गई थी जिसका परिणाम 12 मई, 2020 को घोषित किया गया था.Also Read - पति को छोड़ किसी दूसरे के साथ लिव-इन में रह रही महिला, कोर्ट से मांगी सुरक्षा तो पड़ी फटकार, रिट याचिका भी खारिज

न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने 30 मई को आशुतोष कुमार श्रीवास्तव और 60 अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए इस मामले में विस्तृत फैसला सुनाया. याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, “इन अभ्यर्थियों द्वारा की गई त्रुटि की प्रकृति मानवीय नहीं कही जा सकती. याचिकाकर्ताओं को दिए गए निर्देश ध्यान से पढ़ने चाहिए थे और पूर्व की परीक्षाओं में प्राप्त अंकों के संबंध में प्रविष्टियों को सही से भरना चाहिए था.” अदालत ने कहा, “यह दलील कि यह ऐसी गलती थी जो कंप्यूटर आपरेटर द्वारा की गई, स्वीकार्य नहीं है. यदि अदालतें इस तरह की याचिकाएं स्वीकार करने लगें तो इससे ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी जहां याचिकाकर्ताओं को गलत चीज का लाभ मिलने लगेगा.” Also Read - Live-In Relationship: पति को छोड़ दूसरे के साथ रह रही महिला को हाईकोर्ट से झटका, लगाया जुर्माना

अदालत ने कहा, “प्रत्येक उम्मीदवार को आवेदन फार्म सही से भरने के लिए अपनी गलती का परिणाम भुगतना आवश्यक है. रिकार्ड पर गौर करने पर मेरा विचार है कि ये गलतियां ना ही मामूली हैं और ना ही मानवीय हैं.” अदालत ने यह भी कहा कि आयोग द्वारा प्रतियोगी परीक्षाएं लोक सेवा के लिए अत्यंत गोपनीय ढंग से आयोजित की जाती हैं ताकि प्रतिभाशाली लोग मिल सकें. इसलिए उत्तर पुस्तिका में दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए. Also Read - इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को दी बड़ी राहत, जानें क्या है नया आदेश...

उल्लेखनीय है कि इन याचिकाकर्ताओं ने सहायक अध्यापक परीक्षा के लिए आवेदन किया था और वे छह जनवरी, 2019 को इस परीक्षा में शामिल हुए जिसका परिणाम 12 मई, 2020 को घोषित किया गया जिसमें क्वालिफाइंग अंक हासिल करने वाले सभी याचिकाकर्ता पात्र घोषित किए गए. इन याचिकाकर्ताओं ने बीएड के अंक भरने के संबंध में गलती कर दी. याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी थी कि यह गलती केवल मानवीय भूल है, लेकिन अदालत ने यह दलील स्वीकार नहीं की.