नई दिल्ली: लॉकडाउन के दौरान शिक्षा जगत से जुड़े ज्वलंत मु्ददों को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने दो दिन में 8.68 लाख विद्यार्थियों से संपर्क किया. एबीवीपी के 87868 कार्यकताओं ने बीते 11 और 12 मई को इन विद्यार्थियों को फोन कर उनसे शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की. विद्यार्थियों से संवाद के आधार पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने सामान्य प्रोन्नति की अपेक्षा कैरी ओवर, ओपन बुक एग्जाम, सतत विद्यार्थी मूल्यांकन जैसी परीक्षा पद्धतियों को अपनाने की मांग की. संगठन ने कहा है कि सभी सुझावों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया जाएगा. Also Read - भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच कई रक्षा समझौते, दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य अड्डे करेंगे प्रयोग

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संपर्क अभियान के दौरान छात्रों ने परीक्षा संबंधी विषयों को प्रमुखता से उठाया है. इंटरनेट की समस्या तथा विश्वविद्यालयों के पास ऑनलाइन परीक्षा करवाने के लिए संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण छात्रों ने एक सुर में कैरी ओवर और इन-हाउस जैसे विकल्प को परीक्षा के रूप में अपनाने की मांग की है. विश्वविद्यालय परीक्षा सम्बंधी निर्णय लेने हेतु स्वतन्त्र हैं मगर कईं राज्य सरकारें विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का हनन करते हुये स्वयं निर्णय ले रही हैं. एबीवीपी का परीक्षा कराने के संदर्भ में स्पष्ट मत है, कि ऐसा कोई भी विकल्प नहीं अपनाना चाहिए जिससे दीर्घ काल में एक भी छात्र का अहित हो. Also Read - ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी से कहा- आपको 'गुजराती खिचड़ी' बनाकर खिलाऊंगा, समोसों का भी हुआ ज़िक्र

छात्रों ने डिजास्टर मैनेजमेंट, योग आदि को पाठ्यचर्या में शामिल करने, तकनीक संपन्न क्लासरूम का निर्माण, छात्रों के लिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल करने में आयु में छूट आदि सुझाव दिए हैं. एबीवीपी इन विषयों पर विस्तृत चर्चा के उपरांत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपेगी. एबीवीपी की राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा, “365 दिन सक्रिय रहने की कार्यशैली के अनुरूप सम्पर्क अभियान के माध्यम से एबीवीपी कार्यकतार्ओं ने व्यापक स्तर पर छात्रों का मत जानने का प्रयास किया है. हम छात्रों से मिले सुझावों के आधार पर विभिन्न स्तर पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे. छात्र समुदाय के हितों के लिए बड़े बदलाव की आवश्यकता है जिसके लिए जमीनी स्तर पर कड़े कदम उठाए जाना आवश्यक है, तभी हम शिक्षा क्षेत्र में समय की मांग के अनुसार परिवर्तन कर सकेंगे.” Also Read - One Nation One Market Scheme: लाखों किसानों के लिए मोदी सरकार का बड़ा फैसला- एक राष्ट्र-एक बाजार नीति को मिली मंजूरी