Tips for Hindi Exam:  सीबीएसई बोर्ड की 10वीं की परीक्षाएं चल रही हैं. शनिवार को हिन्दी का पेपर है. हिन्दी हमारी मातृभाषा है. कई छात्र इसे बेहद हल्के में लेते हैं. उन्हें लगता है कि हिन्दी तो उनका अपना सब्जेक्ट है. इसमें कोई दिक्कत नहीं आएगी. वो तो इसमें अच्छा स्कोर कर लेंगे, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि बोल-चाल में हम जिस हिन्दी का प्रयोग करते हैं और एक विषय के रूप में हम जब हिन्दी को पढ़ते हैं तो उसमें काफी अंतर होता है. कई छोटी-छोटी ऐसी चीजें हैं जिसका हम बोल-चाल में प्रयोग गलत करते हैं, लेकिन एक विषय के रूप में लिखते समय हम ऐसा नहीं कर सकते. हमें हिन्दी विषय को गम्भीरता से लेना होगा. हम आपको कुछ चीजें बताते हैं जिस पर ध्यान देकर आप हिन्दी विषय में अच्छा स्कोर कर सकते हैं. Also Read - कोरोना ने बोर्ड से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी लगाया ब्रेक, अब तक ये 16 एग्ज़ाम हो चुके हैं पोस्टपोन

1. गैरजरूरी शब्दों के इस्तेमाल से बचें
हिन्दी लेखन की एक सबसे खराब चीज यह है कि बच्चे एक ही वाक्य में कई गैरजरूरी शब्दों का इस्तेमाल करते हैं. जैसे- ‘मैं सोमवार के दिन स्कूल नहीं जाऊंगा’. इस वाक्य में ‘के दिन’ का प्रयोग गैरजरूरी है. यह वाक्य ऐसा होना चाहिए- मैं सोमवार को स्कूल नहीं जाऊंगा. Also Read - Coronavirus: CBSE ने 10वीं व 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 31 मार्च तक स्थगित कीं, JEE मेन परीक्षा भी टली

2. संधि के नियम
छात्र हिन्दी के संधि के नियमों बहुत गड़बड़ी करते हैं. उन्हें खासतौर पर ‘आ’ की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए. जैसे एक शब्द है अत्यधिक. इसका संधि-विच्छेद करने पर यह अति+अधिक है. इसका संधि करने पर यह अत्यधिक बनता है, लेकिन छात्र अक्सर अत्याधिक लिखते हैं, जो गलत है. Also Read - CBSE बोर्ड एग्ज़ाम स्थगित: स्टूडेंट्स बोले- अगर जान खतरे में है तो परीक्षाएं किस काम की?

3. कारक चिन्ह का सही इस्तेमाल
व्याकरण की दृष्टि से हिन्दी में शुद्ध लेखन आसान नहीं है. हिन्दी में जब भी जातिवाचक संज्ञा शब्द के कारक चिन्ह आता है तो आकारांत वाले शब्द एकारांत हो जाते हैं. जैसे- हम बोलते हैं रास्ता पर एक पेड़ गिरा पड़ा था. यह लगता है. इसकी जगह सही वाक्य- रास्ते में एक पेड़ गिरा पड़ा था. इसी तरह ‘गधा ने ताल मारी’ वाक्य लगता है. इसकी जगह- गधे ने लात मारी होना चाहिए.

4. करण प्रत्यय का सही इस्तेमाल
हिन्दी भाषा में ‘करण’ प्रत्यय का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है और अच्छे-अच्छे लोग इसमें लगती करते हैं. जैसे- ‘सशक्त’ शब्द में करण प्रत्यय लगाने से ‘सशक्तीकरण’ शब्द बनता है, लेकिन अधिकतर लोग ‘सशक्तिकरण’ ऐसे लिखते हैं. इसकी तरह राष्ट्रीय शब्द में करण प्रत्यय लगाने के बाद राष्ट्रीयकरण शब्द बनता है न कि राष्ट्रियकरण.

5. पानी-तेल जैसे पदार्थों का बहुवचन नहीं होता
10वीं की परीक्षा देने जा रहे छात्रों को इस सबसे जरूरी बात का ध्यान रखना चाहिए कि पानी या तेल जैसे तरल पदार्थों को बहुवचन नहीं होता. जैसे ‘पसीना’ का बहुवचन पसीने नहीं होगा. आप यह नहीं लिख सकते कि खेल में मैदान में मुझे बहुत पसीने निकल रहे थे. यह गलत है. सही वाक्य है- खेल के मैदान में बहुत पसीना निकल रहा था. इसी तरह उसने दो गिलास दो पिए… गलत वाक्य है. सही वाक्य होगा- उसने दो गिलास दूध पिया.

6. अनुस्वार और बिंदी का इस्तेमाल
आमतौर पर समझ लिया जाता है कि आधा न (न्) के बदले हर शब्द में बिंदी का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह पूरी तरह गलत है. जैसे एक शब्द है ‘कान्हा’. इसकी जगह आप ‘कांहा’ नहीं लिख सकते. यह गलत है. वैसे आजकल हिंदी और हिन्दी दोनों तरह से लिखी जा रही है, लेकिन सही शब्द ‘हिन्दी’ है. ‘किन्हीं’ सही है न कि ‘किंही’.

7. लिंग का सही इस्तेमाल
हिन्दी व्याकरण में लिंग के सही इस्तेमाल के बारे में काफी नियम बताए गए हैं, लेकिन हम आपको एक सबसे आम लगती बताते हैं. एक वाक्य में जब भी दोनों लिंगों यानी स्त्रीलिंग और पुलिंग की बात होती है तो वाक्य की संरचना हमेशा पुलिंग के हिसाब से होगी. जैसे राम और सीता वन में टहल रहे थे. यहाँ वाक्य की संरचना राम के हिसाब है. आप यह नहीं लिख सकते कि राम और सीता वन में टहल रही थीं.

8. छोटी और बड़ी ‘इ’ का सही इस्तेमाल
बच्चे आमतौर पर शब्दों में छोटी और बड़ी ‘इ’ के इस्तेमाल में गलती करते हैं. सबसे आम गलती किसी शब्द का बहुवचन बनाते समय ‘इ’ की गलती करना है. एक शब्द है ‘विदेशी’. बच्चे इसका बहुवचन ‘विदेशीयों’ लिख देते हैं. यह गलत है. व्याकरण का नियम है कि जब भी आप ऐसे शब्दों का बहुवचन बनाते हैं तो शब्द के अंतिम अक्षर लगी बड़ी इ की मात्रा छोटी हो जाती है. यानी सही शब्द होगा विदेशियों. इसी मंत्री शब्द का बहुवचन मंत्रियों होगा.

9. की और कि का सही इस्तेमाल
बच्चे हमेशा वाक्य के बीच की और कि के इस्तेमाल को लेकर कंफ्यूज होते हैं. आपको यह ध्यान रखना चाहिए कि ‘बड़ी की’ यानी ‘की’ हमेशा में शब्दों को बीच सम्बन्ध स्थापित करने के लिए इस्तेमाल की जाती है. जैसे राम की कलम. मोहन की गाड़ी. वहीं जब हम छोटी कि यानी ‘कि’ लिखते हैं को इसका इस्तेमाल हम किसी बात को स्थापित करने के लिए करते हैं. जैसे- नेहा कह रही थी कि… यहाँ ‘कि’ छोटी होगी. यहाँ आप इस नुस्खे को भी अपना सकते हैं. जब भी किसी वाक्य के अंत के बाद ‘कि’ आता है तो वह छोटी होगी. जैसे- मैं गाड़ी चला रहा था कि कुत्ता आ गया.

10. ‘हैं’ का सही इस्तेमाल
हिन्दी व्याकरण में ‘हैं’ इस्तेमाल को लेकर काफी कंफ्यूजन रहता है. आम पर बहुवचन वाले वाक्य के अंत में ‘हैं’ का इस्तेमाल होता है. जैसे- कक्षा में छात्र आ चुके हैं. यहां पर ‘हैं’ का इस्तेमाल बहुवचन के संदर्भ में हुआ. लेकिन जब हम किसी को सम्मान देते हुए वाक्य लिखते हैं तो वहां भी ‘हैं’ का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे कक्षा में शिक्षक आ गए हैं. इस वाक्य में शिक्षक को सम्मान देने के लिए ‘हैं’ लिखा गया है. प्रधानमंत्री आ चुके हैं. लिखना ठीक होगा. प्रधानमंत्री आ चुका है.. लिखना लगत है.

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