CBSE की 3-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा संदेश, कहा- कुछ नया सीखना फायदे का सौदा

Written By: Gargi Santosh Updated by: Gargi Santosh
Updated Date:July 14, 2026 10:51 PM IST

CBSE की 3-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र, NCERT और CBSE ने अपना पक्ष रखा. NEP 2020 के तहत लागू होने वाले नए नियम छात्रों को बहुत फायदा होगा. जानें इसके बारे में...

  • केंद्र सरकार, CBSE और NCERT ने सुप्रीम कोर्ट में तीन-भाषा नीति का बचाव किया
  • सरकार ने कहा कि यह नीति बहुभाषावाद और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करेगी
  • CBSE ने बताया विदेशी भाषाएं हटाई नहीं गई हैं, उन्हें पढ़ने का ऑप्शन रहेगा
  • कोर्ट ने नई याचिकाओं पर केंद्र और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा है

CBSE Language Policy: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू की जा रही तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. इस दौरान केंद्र सरकार, CBSE और NCERT ने कहा कि यह नीति बहुभाषावाद, भारतीय भाषाओं के संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाई गई है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में दाखिल दो नई याचिकाओं पर केंद्र, CBSE और NCERT से जवाब भी मांगा है. इन याचिकाओं में कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं, जिनमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, पढ़ाने की नीति को चुनौती दी गई है.

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सरकार ने बताया 3 भाषा नीति क्यों जरूरी है?

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने अपने हलफनामे में कहा कि NEP-2020 के तहत तैयार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCFSE-2023) के अनुसार, कक्षा 6 से 10 तक छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी. सरकार का कहना है कि इससे छात्रों में भारतीय संस्कृति, भाषा और विरासत के प्रति सम्मान बढ़ेगा. साथ ही वे मानवाधिकार, सतत विकास और वैश्विक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे.

CBSE ने छात्रों को दी राहत, विदेशी भाषाएं जारी रहेंगी

CBSE ने सुप्रीम कोर्ट में साफ किया कि तीन-भाषा नीति को चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा रहा है. बोर्ड ने कहा कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 10वीं कक्षा में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा पढ़ना जरूरी नहीं होगा. वहीं, 12वीं के छात्रों के लिए तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर होगा और 2027-28 में 10वीं बोर्ड परीक्षा में भी तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं होगी. CBSE ने स्पष्ट किया कि विदेशी भाषाएं जैसे फ्रेंच या अन्य भाषाएं हटाई नहीं गई हैं. छात्र उन्हें तीन भाषाओं में से एक या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ सकते हैं. बोर्ड ने विदेशी भाषाएं खत्म किए जाने के दावे को पूरी तरह गलत बताया.

CBSE ने तैयारी को लेकर दिया अपडेट

CBSE और NCERT ने अदालत को बताया कि नई नीति लागू करने के लिए जरूरी संसाधनों की तैयारी पहले से की जा रही है. NCERT ने 22 अनुसूचित भाषाओं के लिए अध्ययन सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है. साथ ही हिंदी, संस्कृत, मराठी और उर्दू की किताबें वेबसाइट पर अपलोड करा दी हैं. शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए सेवानिवृत्त शिक्षकों की नियुक्ति, योग्य स्नातकोत्तर, ऑनलाइन और हाइब्रिड पढ़ाई जैसे ऑप्शन दिए जाएंगे. बोर्ड ने यह भी कहा कि दूसरे राज्य में स्थानांतरण होने पर छात्रों को अपनी मौजूदा भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की सुविधा मिलेगी.

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