नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कॉमन लॉ एंट्रेंस टेस्ट CLAT 2018 को दोबारा कराने की मांग करने वाली तीन राज्यों के छह छात्रों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की. जस्टिस ए.एम खानविलकर और जस्टिस नवीन सिन्हा की बेंच ने CLAT 2018 मामले की सुनवाई की. याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने किया. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिका की एक कॉपी NUALS, केंद्र सरकार और CLAT की कोर कमेटी को भेजी जाएगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश के 6 उच्च न्यायलों में यदि इसी तरह के मामले पहले आ चुके हैं, जिन पर फैसला भी सुनाया जा चुका है, कोर्ट उन मामलों के डिटेल्स भी देखेगा. अब CLAT 2018 मामले की सुनवाई कल यानी गुरुवार को होगी.

क्या है पूरा मामला
दरअसल, CLAT 2018 को NUALS द्वारा 13 मई को आयोजित किया गया था. परीक्षा के आयोजन में NUALS के साथ एक निजी कंपनी M/s Sify Technologies Ltd भी थी. इस परीक्षा में हर साल हजारों की संख्या में छात्र हिस्सा लेते हैं. इस बार कई परीक्षा केंद्रोंं पर छात्रों को तकनीकी गड़बड़ियों का सामना करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें 5 से 30 मिनट का नुकसान हुआ. ऐसे में छात्रों ने अपनी याचिका में यह बात कही है कि CLAT 2018 की ऑनलाइन परीक्षा के दौरान उन्हें इलेक्ट्रॉनिक स्तर पर और ऑनलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. मसलन, परीक्षा के बीच में ही बिजली का गुल हो जाना, लॉग-इन सिस्टम का फेल हो जाना, बायोमीट्रिक वेरीफिकेशन का धीमा होना, ब्लैंक स्क्रीन, लॉग-इन करने में ज्यादा वक्त लगना, कंप्यूटर का बार-बार रीसेट होना, कंप्यूटर का हैंग होना, सर्वर का शटडाउन होना और एक सवाल हल करने के बाद दूसरे सवाल पर जाने में ज्यादा वक्त लगना.

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इन परेशानियों के कारण परीक्षा के दौरान छात्रों का औसतन 5 से 30 मिनट तक का समय बरबाद हुआ. CLAT की परीक्षा में 200 सवालों को सुलझाने के लिए 120 मिनट का वक्त मिलता है, ऐसे में छात्रों के लिए एक-एक मिनट कीमती है.

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि इस तरह की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और कठिन परीक्षा में समय किसी भी छात्र के भविष्य निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. सिर्फ एक गलत जवाब या एक सवाल को ना सुलझाना परीक्षा में बैठे छात्र को भारी पड़ सकता है. उसकी रैंकिंग हजारों पायदान खिसक सकती है. याचिका में यह भी कहा गया है कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

तकनीकी समस्याओं के अलावा याचिकाकर्ता ने परीक्षा के दौरान सामने आई कुछ अन्य समस्याओं का भी उल्लेख किया है. जैसे कि परीक्षा केंद्रों का खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, परीक्षा केंद्रों के लिए जिन स्टाफ्स को रखा गया था, उनसे पर्याप्त गाइडेंस नहीं मिल पाई और कई सेंटर्स पर परीक्षा के लिए अनुचित आचरण आदि जैसे मुद्दों को भी उठाया गया है.

हालांकि CLAT 2018 को लेकर यह पहली याचिका नहीं है. देश के विभिन्न उच्च न्यायलयों में CLAT 2018 में हुई अनियमितताओं को लेकर याचिका दायर की गई है, जिसमें CLAT 2018 परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग की गई है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई कल यानी गुरुवार को एक बार फिर करने वाला है.