CLAT Exam in Regional Languages: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने कानून की पढ़ाई कराने वाले संस्थानों के लिये क्षेत्रीय भाषाओं में ‘कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट’ (क्लैट) कराने की व्यवहार्यता पर विचार करने के उद्देश्य से एक समिति गठित की है. बीसीआई ने कहा है कि कानूनी शिक्षा एवं पेशे के नियामक होने के नाते उसका ‘‘पृथम दृष्टया’’ यह विचार है कि कोई भी योग्य उम्मीदवार (छात्र) अंग्रेजी भाषा में अपनी पकड़ कमजोर होने के कारण क्लैट देने से वंचित न रह जाए. Also Read - CLAT 2020 Latest News: क्लैट का एग्जाम एक बार फिर टला, जानें अब कब होगी परीक्षा 

बीसीआई ने एक बयान में कहा, ‘‘अंग्रेजी भाषा के ज्ञान की कमी होना किसी की बौद्धिक क्षमता, योग्यता, कुशाग्रता, समर्पण, आईक्यू आदि को निर्धारित नहीं कर सकता. इसलिए, प्रथम दृष्टया यह प्रवेश परीक्षा क्षेत्रीय भाषाओं में भी होनी चाहिए. उल्लेखनीय है कि बीसीआई अखिल भारतीय बार परीक्षा 11 भाषाओं में कराती है. ’’ Also Read - AIBE 2020: ऑल इंडिया बार एग्जाम के लिए आवेदन करने की बढ़ी डेट, ये है अप्लाई करने की आखिरी तारीख, जानें डिटेल

शीर्ष बार संस्था ने कहा कि एक दूसरा पहलू, जिस पर विचार करने की जरूरत है, यह है कि आज की तारीख में देश भर में विश्वविद्यालय कितनी क्षेत्रीय भाषाओं में सेमेस्टर परीक्षाएं ले रहे हैं. बीसीआई ने कहा, ‘‘हालांकि, यह स्पष्ट है कि क्लैट की समस्या खत्म होने के बाद अगला अनुरोध राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर परीक्षाएं क्षेत्रीय भाषाओं में कराने का अनुरोध किया जा सकता है.’’ Also Read - CLAT 2020 Exam: क्लैट के लिए आवेदन करने की कल है आखिरी तारीख, ऐसे करें आसानी से अप्लाई

बीसीआई ने कहा, ‘‘चूंकि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्वरूप के हैं और इनकी तुलना किसी अन्य राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों या निजी विश्वविद्यालयों से नहीं की जा सकती है, इसलिए इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श करने की जरूरत है. ’’ बीसीआई ने कहा कि इस मुद्दे पर सात सदस्यीय एक समिति गठित की गई है, जो हालात का जायजा लेगी और जरूरी सुझाव देगी. इसके तहत राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयेां और अन्य पक्षों, हितधारकों के विचार लिये जाएंगे.

शीर्ष बार संस्था ने कहा कि समिति के सदस्यों में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पूर्व एवं मौजूदा कुलपति, अकादमिक जगत के अन्य विद्वान और बीसीआई के दो सदस्य शामिल होंगे. बीसीआई ने कहा कि समिति का नेतृत्व किसी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश करेंगे. गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने बीसीआई को इस विषय पर विचार करने का निर्देश दिया था क्योंकि क्लैट 2020 और भविष्य में भी यह परीक्षा सभी स्थानीय भाषाओं में कराने का अनुरोध करते हुए एक याचिका दायर की गई थी. अदालत के निर्देश के बाद बीसीआई ने यह बयान जारी किया है.