नई दिल्ली: दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कोविड-19 महामारी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए हर कक्षा के पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत की कमी करने की मांग करते हुए स्कूलों को उचित सावधानियों के साथ खोले जाने की वकालत की है. मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को लिखे एक पत्र में सिसोदिया ने जोर दिया कि लोगों को अब कोरोना वायरस के साथ जीना सीखने की जरूरत है, ऐसे में बेहतर होगा कि स्कूलों जैसे पहले से मौजूद सीखने वाले स्थानों का इस भूमिका के लिये इस्तेमाल किया जाए. Also Read - School Reopen Latest News: स्कूल खोलने को लेकर शिक्षा मंत्रालय कर रहा मंथन, MHA के निर्णय के बाद सितंबर से हो सकता है ओपन  

उन्होंने कहा कि ऑनलाइन शिक्षा स्कूल में मिलने वाली शिक्षा की पूरक हो सकती है, उसका स्थान नहीं ले सकती. अगर स्कूलों को बड़ी और साहसी भूमिका देने के लिये उन पर विश्वास न कर इस “अवसर” को जाने दिया गया तो यह “ऐतिहासिक भूल” होगी. उन्होंने कहा कि स्कूलों की महती भूमिका बच्चों को सिर्फ किताबों के कुछ सबक याद करा देने भर की नहीं बल्कि उन्हें बेहतर और जिम्मेदार जीवन के लिये तैयार करने की है. Also Read - School Reopen Latest News: अगले महीने से फिर से खुल सकते हैं स्कूल, कॉलेजों में नहीं होगी इस साल जीरो ईयर, जानें पूरी डिटेल

सिसोदिया ने कहा, “सबसे पहले हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि हर बच्चा, भले ही वह किसी भी उम्र या सामाजिक वर्ग का हो, हमारे लिये महत्वपूर्ण है और उन सभी का अपने विद्यालय की भौतिक व बौद्धिक सम्पदा पर समान अधिकार है. ऑनलाइन शिक्षा के शोर या पहले बड़े बच्चों को स्कूल आना चाहिए न कि छोटे बच्चों को, पर विराम लगना चाहिए.” उन्होंने कहा, “ऑनलाइन शिक्षा विद्यालय में पढ़ाई की पूरक हो सकती है, उसका स्थान नहीं ले सकती.” Also Read - झारखंड के शिक्षामंत्री ने 11वीं में लिया दाखिला, विपक्षी देते थे 10वीं ही पास होने का ताना तो फिर शुरू की पढ़ाई

दिल्ली के शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी भी सिसोदिया निभा रहे हैं. उन्होंने सुझाव दिया, “सभी कक्षाओं और विषयों का पाठ्यक्रम कम से कम 30 प्रतिशत घटा देना चाहिए. जोर सीखने की गहराई और समझ विकसित करने पर दिया जाना चाहिए न कि विषय को विस्तार देने पर. इसे परीक्षा सुधारों के साथ जोड़ा जाना चाहिए. सीबीएसई को 10वीं और 12वीं की एक बार परीक्षा लेने की जगह लगातार मूल्यांकन का प्रारूप अपनाना चाहिए जिससे छात्र जब चाहे ऑनलाइन परीक्षा दे सकें.”