नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) के एक आदेश से एमफिल और पीएचडी करने वाले हजारों छात्र परेशान हैं और इस कानून की वजह से इस साल दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) में एमफिल और पीएचडी की कई सीटें खाली रह सकती हैं. एक तो पहले ही देश में एमफिल और पीएचडी की सीटें बहुत कम हैं और उसके बाद यूजीसी के इस आदेश से मौजूदा सीटें भी खाली रह सकती हैं.

क्या है आदेश?
यूजीसी के इस नए कानून के मुताबिक, स्टूडेंट को एमफिल और पीएचडी के इंटरव्यू में शामिल होने के लिए एंट्रेंस एग्जाम में कम से कम 50 पर्सेंट नंबर लाना जरूरी है, ऐसा न होने पर छात्र एमफिल और पीएचडी के लिए इंटरव्यू में नहीं बैठ सकेगा. यूजीसी का ये नियम जनरल और आरक्षित दोनों कैटेगिरी के छात्रों के लिए है, ऐसे में कई कोर्स ऐसे हैं जिनमें एससी, एसटी वर्ग से एक भी छात्र इंटरव्यू में नहीं बैठ सकेगा.

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क्यों है तानाशाही आदेश?
यूजीसी ने ये नियम 2016 में बनाया था जिसे 2017 में दिल्ली यूनिवर्सिटी की एकेडमिक काउंसिल और इग्जेक्यूटिव काउंसिल ने पास किया था. इस साल पहली बार एमफिल पीएचडी में इस आदेश का पालन किया जा रहा है. डीयू के मॉडर्न इंडियन लैंग्वेज डिपार्टमेंट में पीएचडी की कुल 35 सीटे हैं जिसमें से कुछ सीटें नेट और जेआरएफ वालों के लिए रिजर्व हैं लेकिन एंट्रेंस एग्जाम में सिर्फ 8 स्टूडेंट ही 50 पर्सेंट से ज्यादा स्कोर कर सके हैं, ऐसे में सिर्फ 8 स्टूडेंट ही इंटरव्यू में बैठेंगे और बाकी सीटें खाली रह जाएंगी.

छात्रों में जबर्दस्त गुस्सा
स्टूडेंट्स में इस आदेश के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा है और वो इस आदेश को हटाने की मांग कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि ये नियम गलत है और इससे पिछड़े और गरीब घरों से आने वाले बच्चों का भविष्य बर्बाद हो जाएगा. इसलिए यूजीसी और डीयू को जल्द से जल्द इस नियम को हटाना चाहिए.

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पहले कुछ डिपार्टमेंट में इस आदेश के बिना सबको इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था लेकिन बाद में एक नया नोटिफिकेशन निकाला गया जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा नंबर लाने वालों को ही इंटरव्यू में बुलाया गया है. ऐसा ही हाल एडल्ट एजूकेशन डिपार्टमेंट का है जहां पीएचडी की 23 सीटें हैं लेकिन सिर्फ 5 छात्रों के ही 50 पर्सेंट से ज्यादा नंबर आए हैं, वहीं एमफिल में भी 13 सीटें हैं लेकिन सिर्फ 5 छात्रों के ही 50 फीसदी से ज्यादा नंबर आए हैं और उन्हें ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है.

सब जगह यही है हाल
बड़े डिपार्टमेंट जैसे हिस्ट्री और पॉलिटिकल साइंस में भी यही हाल है, पॉलिटिकल साइंस में 10 छात्रों के ही 50 पर्सेंट से ज्यादा नंबर आए हैं जबकि वहां पीएचडी में सीटें 16 हैं. हिस्ट्री डिपार्टमेंट में तो स्थिती और खराब है जहां पीएचडी की 30 सीटें हैं लेकिन एंट्रेंस एग्जाम में सिर्फ 3 स्टूडेंट्स के ही 50 पर्सेंट से ज्यादा नंबर आए हैं और सिर्फ इन 3 छात्रों को ही इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है. ऐसे में कई डिपार्टमेंट में सीटें खाली रह सकती हैं.

वीसी को लिखा लेटर
ईसी मेंबर डॉक्टर राजेश झा भी यूजीसी के इस आदेश के खिलाफ हैं. उनका कहना है कि इस आदेश के पालन से छात्रों के लिए मौके कम होंगे. झा ने इस नियम को हटाने के लिए वाइस चांसलर को भी एक लेटर लिखा है और अभी चल रहे इंटरव्यू प्रोसेस को रोक कर नए तरीके से बिना इस आदेश के इंटरव्यू करवाने का आग्रह किया है.