गुजरात की MBBS टॉपर डॉ. हिना हिंगद ने सांसारिक सुखों और अपने परिवार कर अध्यात्म का रास्ता अपना लिया है. वह जैन साध्वी बन गई हैं. हिना हिंगद गुजरात के समृद्ध परिवार से ताल्लुख रखती हैं. 28 साल की हिना ने अध्यात्मिक गुरु आचार्य विजय यशोवर्मा सुरेशवरजी महाराज से सूरत में बुधवार को पूरे विधि विधान से दीक्षा प्राप्त की है और जैन साध्वी बन गईं. दीक्षा लेने के बाद अब हिना हिंगद का नाम मुनि साध्वी विशारद मालाश्री हो गया है.Also Read - #WorldAIDSDay: हर दो मिनट में एक बच्चा हुआ संक्रमित, जागरुकता के लिए बच्चों ने बनाई ह्यूमन चेन

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अहमदाबाद यूनिवर्सिटी से गोल्ड मेडलिस्ट हिना पिछले तीन साल से डॉक्टरी प्रैक्टिस कर रही थीं. हिना के अनुसार छात्र जीवन से ही अध्यात्म उन्हें बहुत आकर्षित करता था. हिना 6 बहन हैं. 6 बहनों में हिना सबसे बड़ी हैं. हिना ने यह महसूस किया कि मेडिकल के पेशे से उन्हें वह खुशी नहीं मिलती, जो अध्यात्म से मिलती है. Also Read - Omicron: इन देशों के यात्रियों को RTPCR टेस्ट के बिना गुजरात में नहीं मिलेगी एंट्री, राज्य सरकार ने किया अनिवार्य

सांसारिक सुखों को त्याग कर अध्यात्म के लिए समर्पित होने का फैसला हिना के परिवार को मंजूर नहीं था. खासतौर से हिना की बहनें उनके इस फैसले से खुश नहीं थीं. लेकिन हिना ने अपने परिवार को यह समझा ही दिया कि कुछ लोग भौतिकवादी जीवन के लिए नहीं बने होते और वे संत बन जाते हैं. संत बनना हर किसी के बस की बात नहीं होती. हिना पिछले 12 साल से अपने माता पिता को दीक्षा लेने के लिए मना रही थीं. हिना के इस फैसले से उनकी बहनें बहुत दुखी थीं. उनकी सबसे बड़ी बहन उन्हें छोड़कर जा रही थी. लेकिन बाद में उन्होंने हिना के फैसले का समर्थन किया.

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साध्वी बनने के लिए हिना ने गुजरात, पलिताना के मशहूर जैन मंदिर में 48 मेडिटेशन किए. जैन साध्वी बनने के लिए यह अनिवार्य है. आचार्य विजय के अनुसार हिना ने पिछले जीवन की निष्ठा और तपस्या के कारण जैन धर्म को अपनाने का फैसला लिया है.

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