IAS Success Story: दोपहर का समय था और गर्मी अपने चरम पर थी. तेलंगाना के सिद्दीपेट जिले के कोंडापाका गांव में बुद्धि नरेश अपने खेतों में काम कर रहे थे. तभी, उनके मोबाइल की घंटी बजी. नरेश ने फोन उठाया, तो बड़े बेटे बुद्धि अखिल की आवाज आई. अखिल ने खुशी के साथ बताया, ‘बापू, मैं आईएएस बन गया हूँ.’ यह सुनते ही नरेश का दिल गर्व से भर गया और उन्होंने तुरंत घर जाकर पत्नी ललिता और छोटे बेटे अजय को खुशखबरी दी. पूरे परिवार ने खुशी में डांस किया.
पिछली सफलताओं और चुनौतियों का सफर
बुद्धि अखिल ने UPSC 2023 परीक्षा में 321वीं रैंक प्राप्त की है. हालांकि, यह उनकी पहली सफलता नहीं है. 2021 में उन्हें यूपीएससी में 566वीं रैंक मिली थी, जिसके बाद उनकी नियुक्ति दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर हुई थी. लेकिन अखिल का सपना आईएएस बनने का था. उन्होंने तय किया कि वह फिर से प्रयास करेंगे और इसके लिए उन्होंने एक साल की छुट्टी ली.
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कड़ी मेहनत और सेल्फ स्टडी
अखिल ने बिना किसी कोचिंग के यह सफलता हासिल की है. वह काकतीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद यूपीएससी की तैयारी में जुट गए थे. घर पर रहकर उन्होंने ऑनलाइन सामग्री से नोट्स तैयार किए और सेल्फ स्टडी पर ध्यान दिया. पहली बार 2019 में परीक्षा दी और पांच प्रयासों में तीन बार मेन्स क्लियर किया. दो बार इंटरव्यू में सफलता मिली और अंततः आईएएस बन गए.
हार न मानने की प्रेरणादायक कहानी
यूपीएससी रिजल्ट के बाद कई सफलता की कहानियाँ सामने आईं. कर्नाटक पुलिस के सब-इंस्पेक्टर शांथप्पा के. की कहानी भी प्रेरणादायक है. शांथप्पा ने लगातार सात साल यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन हर बार असफल रहे. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और आठवें प्रयास में सफलता हासिल की. यह कहानी दर्शाती है कि मेहनत और लगन से बड़े सपने भी पूरे हो सकते हैं.
