नई दिल्ली: कहते हैं अगर हौसला हो तो आसमान में भी छेद किया जा सकता है. इस बात को साबित किया है ICSE बोर्ड के लिरॉन डी सिल्वा ने. 16 साल लिरॉन डी सिल्वा को कंसट्रिक्शन बैंड सिंड्रोम है. इसकी वजह से लिरॉन डी सिल्वा के दाहिने हाथ की तीन अंंगुलियों का विकास ही नहीं हो पाया है. सिर्फ अंगूठा और छोटी अंगूली से ही वह लिखते हैं. लेकिन यह कमी लिरॉन डी सिल्वा के हौसले को नहीं तोड़ पाई. बिना किसी दूसरे की मदद से लिरॉन डी सिल्वा ने अपनी 10वींं की परीक्षा दी और परीक्षा में 90.33 प्रतिशत अंक हासिल किया. लिरॉन डी सिल्वा ने मैथ्स में 99 अंक और सोशल साइंस में 97 अंक हासिल किए हैं. Also Read - ICSE, ISC Results 2020: CISCE बोर्ड ने जारी किया 10वीं 12वीं का रिजल्ट, इन वेबसाइटों के साथ SMS के जरिए चेक करें स्कोर

Also Read - CBSE Board Exam Latest News: CBSE बोर्ड परीक्षा को लेकर आई बड़ी जानकारी, जानिए एग्जाम होंगे या नहीं

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार लिरॉन डी सिल्वा के लिए यह आसान नहीं है. लिरॉन डी सिल्वा ने कहा कि यह बहुत मुश्किल है, पर मैं मैनेज करता हूं. मैं अपना पेपर खुद ही लिखना चाहता हूं, क्योंकि किसी दूसरे को लिखने के लिए समझाना कठिन होता है. मैं अपनी काबिलियत पर अच्छा स्कोर हासिल करना चाहता हूं. Also Read - CICSE 10th, 12th Exam 2020: महाराष्ट्र सरकार ICSE की लंबित परीक्षाएं आयोजित करने की नहीं दे सकती अनुमति, जानें पूरा मामला 

DU admissions 2018: 24 घंटे में 43,000 छात्रों ने किया एप्लाई

लिरॉन की मां लिनेट डी सिल्वा ने एक पत्र लिखकर बोर्ड को लिरॉन की परेशानी के बारे में बताया. बोर्ड ने सब कुछ जानने के बाद लिरॉन को परीक्षा में अतिरिक्त समय देने का फैसला किया. लिरॉन को परीक्षा में डेढ़ घंटे अतिरिक्त दिया गया. उनकी मां लिनेट कहती हैं कि लिरॉन कभी अपनी कमियों को हावी नहीं होने देता. स्कूल में उसका 100 प्रतिशत रिजल्ट है. यहां तक कि वह लॉन टेनिस और टाइकवांडू में भी हिस्सा लेता है.