एनएसजी में शामिल होने वाले जवानों को अब देना होगा मनोविज्ञान टेस्‍ट

नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) ब्‍लैक कमांडो बनने की इच्‍छा रखने वाले जवानों को अब मनोविज्ञान की भी परीक्षा देनी होगी

Published date india.com Updated: June 25, 2018 10:43 AM IST
एनएसजी में शामिल होने वाले जवानों को अब देना होगा मनोविज्ञान टेस्‍ट
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली: नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) ब्‍लैक कमांडो बनने की इच्‍छा रखने वाले जवानों को अब मनोविज्ञान की भी परीक्षा देनी होगी. बता दें कि आतंकवादियों और हाईजैकिंग जैसी साजिशों से निपटने वाले इन कमांडो को और ज्यादा चुस्त बनाने के लिए एनएसजी ने यह कदम उठाया है.

अभी तक सेना व अर्ध सैनिक बलों के जवानों को कमांडो बनने से पहले कमांडो कनवर्जेशन कोर्स (सीसीसी) से गुजरना पड़ता है. लेकिन अब एनएसजी में शामिल होने के इच्छुक सैनिकों को तीन महीने के सीसीसी के दौरान मनोविज्ञान परीक्षणों से गुजरना होगा. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ब्रिटेन व जर्मनी की तर्ज पर यह सारी प्रक्रिया होगी. टेस्ट में सर्वश्रेष्‍ठ अंक हासिल करने वाले जवान को ही एनएसजी में जगह मिलेगी. लंबे अर्से से जरूरत महसूस की जा रही थी कि कमांडो सिलेक्शन पैनल में मनोविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ हों. इसके लिए हाल ही में कुछ लोगों को हायर किया गया है. योग को पहले ही रोजाना के प्रशिक्षण में शामिल किया जा चुका है.

चयन प्रक्रिया
एनएसजी अब तक सेना और अर्धसैनिक बलों के कैडेटों का चयन करने के लिए प्रयोग किया जाता है और उन्हें कमांडो कनवर्जेशन कोर्स (सीसीसी) में शामिल होने के लिए कठोर शारीरिक और मानसिक शक्ति परीक्षणों के तहत रखा जाता है.

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