सिनेमा के जरिए पर्दे पर उतारी गई कहानी समाज से ही प्ररित, समाज के ही लिए होती है. पर्दे पर जो कहानी दिखाई जाती है, वह हमपर गहरी छाप छोड़ती है. ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है. दिल्ली हाईकोर्ट ने जेईई मेन्स 2025 परीक्षा से जुड़े एक विवाद में अनोखा और चर्चित आदेश जारी किया है. दो छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर अपनी आंसर कॉपी में छेड़छाड़ का गंभीर आरोप लगाया था. मामला जेईई मेन्स 2025 सत्र का है, जहां इन दोनों कक्षा 12 के छात्रों ने दावा किया कि उनके रिस्पॉन्स शीट में अनियमितताएं हुईं और स्कोरकार्ड में हेरफेर किया गया. उन्होंने एनटीए की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की. शुरुआत में सिंगल बेंच ने 22 सितंबर 2025 को उनकी अर्जी को आधारहीन बताकर निरस्त कर दिया. जांच में ये दावे निराधार साबित हुए. कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी.
30,000 रुपये प्रत्येक का जुर्माना
सिंगल बेंच ने याचिका खारिज करने के साथ दोनों छात्रों पर 30,000 रुपये प्रत्येक का जुर्माना भी ठोका था. छात्रों ने इस फैसले के खिलाफ अपील की. अब चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की डिवीजन बेंच ने दिसंबर 2025 में अपील पर सुनवाई की. बेंच ने सिंगल जज के निष्कर्षों को पूरी तरह सही ठहराया और याचिका की खारिजगी को बरकरार रखा.
लगाए गए जुर्माने को हटाकर सामुदायिक सेवा का निर्देश दिया. यह आदेश सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, क्योंकि इसमें छात्रों को समाज की सेवा करने का मौका मिलेगा, जो उनके लिए एक सबक भी बन सकता है.
छात्रों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए
डिवीजन बेंच ने कहा कि युवा छात्रों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए, लेकिन आधारहीन मुकदमेबाजी से सबक लेना जरूरी है. इसलिए जुर्माने की जगह एक महीने की सामुदायिक सेवा का आदेश दिया गया. एक छात्र को मई-जून 2026 में रोजाना दो घंटे वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की मदद करनी होगी, जबकि दूसरे को गाजियाबाद के किसी बाल देखभाल केंद्र में बच्चों की सेवा करनी पड़ेगी.
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनटीए द्वारा 2025-2026 के लिए जेईई परीक्षा से प्रतिबंधित करना उनके भविष्य पर कलंक नहीं माना जाएगा और वे अन्य परीक्षाओं में शामिल हो सकते हैं. इस फैसले से छात्रों को समाज के कमजोर वर्गों बुजुर्गों और बच्चों की सेवा से empathy और responsibility सीखने का अवसर मिलेगा.
‘सितारे जमीन पर’ फिल्म में आमिर खान (गुशन अरोड़ा) को शराब पीकर गाड़ी चलाने के जुर्म में न्यूरोडायवर्जेंट बच्चों को को बास्केटबॉल सिखाने का काम दिया था.
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