National Research Foundation: Independence Day के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय संबोधन में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) को जगह मिली. इस नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत परिकल्पित स्वायत्त निकाय का जल्द ही गठन किया जाना है. New Education Policy के तहत सबसे बड़ी घोषणाओं में से एक है. इसकी भारत में ‘अनुसंधान की गुणवत्ता’ फंडिंग, मेंटरिंग और निर्माण के बाद दिखेगा. NRF का उद्देश्य भारत में विभिन्न स्ट्रीमों में रिसर्च करने वाले रिसर्चर को फंड उपलब्ध कराना है. Also Read - पीएम मोदी का दुनिया को भरोसा- भारत की टीका उत्पादन क्षमता पूरी मानवता को इस संकट से बाहर निकालेगी

रिसर्च के नॉन साइंस विषयों को अपने दायरे में लाने के लिए NRF चार प्रमुख विषयों में रिसर्च परियोजनाओं को फंड देगा. इसमें साइंस, टेक्नॉलिजी, सोशल साइंस और आर्ट्स और मानविकी शामिल हैं. भारत में रिसर्चरों की कमी के पीछे फंड आवंटन में कमी को अक्सर सबसे बड़े कारणों में से एक के रूप में देखा गया है और NRF का लक्ष्य उसी को पूरा करना है. Also Read - PM Narendra Modi Full speech at UNGA: पीएम मोदी बोले- आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र के निर्णय लेने वाले स्ट्रक्चर से अलग रखा जाएगा?

रिसर्च के लिए आवंटित फंड 2008 में GDP के 0.84 प्रतिशत से घटकर 2014 में 0.69 प्रतिशत हो गया, जैसा कि NEP के मसौदे में उल्लेख किया गया है. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी स्वीकार करती है, “भारत में रिसर्च और इनोवेशन निवेश वर्तमान समय में है, GDP का केवल 0.69  प्रतिशत है. वहीं इसके तुलना में संयुक्त राज्य अमेरिका में 2.8 प्रतिशत,इज़राइल में 4.3 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में 4.2 प्रतिशत है.” Also Read - पीएम मोदी और राजपक्षे के बीच हुई वार्ता, भारत ने कहा- अल्पसंख्यक तमिलों की हो सत्ता में भागदारी

हालांकि, फंड की कमी एकमात्र समस्या नहीं है. भारत में शोध करने वाले छात्रों की संख्या भी बहुत कम है. वर्तमान में देश में शोधकर्ताओं (प्रति लाख जनसंख्या) की संख्या चीन, अमेरिका, साथ ही इजरायल सहित बहुत से छोटे देशों के पीछे है. ऑल इंडिया सर्वे ऑफ हायर एजुकेशन (AISHE) की रिपोर्ट के अनुसार 0.5 फीसदी से कम भारतीय छात्र पीएचडी या समकक्ष स्तर की शिक्षा प्राप्त करते हैं.