NEET 2018: मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा है. मद्रास हाई कोर्ट ने तमिल भाषा में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों को 196 ग्रेस मार्क्स देने का आदेश दिया था. मद्रास उच्च न्यायालय के मदुरै खंडपीठ नेे मंगलवार को यह फैसला सुनाया था. कोर्ट ने CBSE को NEET की रिवाइज्ड रैंक लिस्ट जारी करने का भी निर्देश दिया था.

दरअसल, तमिल भाषा में नीट 2018 परीक्षा देने वाले छात्रों को जो प्रश्न पत्र दिए गए थे, उसके 49 सवालों का गलत ट्रांसलेट किया गया था. तमिल भाषा के प्रश्न पत्र की गड़बड़ियों के मद्देनजर परीक्षार्थियों ने कंपेनसेटरी मार्क्स की मांग की थी. कोर्ट ने नीट परीक्षा में तमिल भाषा में छपे पेपर में 49 सवालों की इसी गलत अनुवाद को लेकर यह फैसला सुनाया था.

NEET 2018: मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकता है CBSE, पढ़ें

लेकिन दूसरी ओर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कहना है कि NEET बुलेटिन में यह स्पष्ट कहा गया है कि रीजनल भाषाओं में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों को बाई-लिंगुअल प्रश्न पत्र दिए जाएंगे. सवालों का ट्रांसलेशन रीजनल भाषा में यदि गलत होता है तो छात्र इंग्लिश वर्जन को देख सकते हैं और अंग्रेजी के प्रश्नपत्र को ही फाइनल माना जाएगा. CBSE इसे ही आधार बनाकर सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया है.

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इस साल लगभग 67,000 एमबीबीएस और 30,000 BDS सीटों पर नीट परीक्षा के जरिये दाखिला होना है. इसके लिए लगभग 13 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए. इसमें लगभग 1.2 लाख तमिलनाडु के हैं. कुल 24,000 छात्रों ने तमिल भाषा में परीक्षा दी है.

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