Neet Candidate Nisha Ahir Suicide In Kota What Is Neet Why Students In Kota Come Under Stress
कोटा में एक और NEET कैंडिडेट ने की आत्महत्या, क्या है ये पेपर, क्यों यहां तैयारी करने वाले स्ट्रेस में आते हैं
'कोचिंग हब' कोटा बदलते वक्त और आती आत्महत्या की खबरों के साथ स्टूडेंट्स के लिए दम तोड़ देने वाली जगह बनती जा रही है. यहां पर पढ़ रहे स्टूडेंट्स में से आत्महत्या करने वालों की खबरें दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही हैं.
देश के ‘कोचिंग हब’ कोटा में इस साल एक और स्टूडेंट ने आत्महत्या की. कोटा में ज़िंदगी की जंग हारने वालों में 22 साल की निशा अहीर का नाम भी शामिल हो गया है. निशा अहीर नीट की तैयारी कर रही थीं. उन्होंने अपने हॉस्टल के कमरे में छत के पंखे से लटककर कथित तौर पर आत्महत्या की. इस साल अब तक वहां जितने बच्चों ने ज़िंदगी को अलविदा कहा, उनमें यह 26वां मामला है.
निशा अहीर उत्तर प्रदेश से थीं
निशा अहीर उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं. वह कोटा के महावीर नगर केल हॉस्टल में रह रहीं थी. डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर महावीरस प्रसाद मीना के मुताबिक निशा के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. उन्होंने बताया कि असली वजह मृतक के परिजनों के यहां पहुंचने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगी. जिला कलक्टर महावीर प्रसाद मीना ने बताया कि प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों और हॉस्टल संचालकों के साथ बैठक कर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिये हैं.
इससे पहले कोटा में NEET की तैयारी कर रहे पश्चिम बंगाल निवासी फौरीद हुसैन ने सोमवार को आत्महत्या की. 18 सितंबर को कोटा में NEET की तैयारी कर रही उत्तर प्रदेश की 16 साल की लड़की ने जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी. यह उस महीने का दूसरा आत्महत्या का मामला था. अगस्त में छह कोचिंग छात्रों ने आत्महत्या की.
क्या है ये पेपर
नीट (NATIONAL ELIGIBILITY CUM ENTRANCE TEST) भारत में मेडिसिन की पढ़ाई के लिए होने वाला एंट्रेंस है. इस पेपर को पास करने वाले ही डॉक्ट बनने के लिए पढ़ाई कर सकते हैं. neet के बिना डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए mbbs जैसे मुख्य कोर्सेज में एडमिशन नहीं मिलता है. नीट एग्जाम देश के सबसे मुश्किल एग्जाम्स में शुमार है. हर साल बड़ी तादाद में स्टूडेंट्स इस परीक्षा को देते हैं.
क्यों इसकी तैयारी करने वाले स्ट्रेस में आते हैं
कोटा में तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स की लगातार आती आत्महत्या की खबरों से वहां के माहौल को समझने के लिए कई रिपोर्ट्स आईं. रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट ने मानसिक स्थिति को समझते हुआ बताया कि स्टूडेंट्स घंटो तक लगातार हाई-प्रेशर में पढ़ते रहते हैं. वहां मौजूद हर बच्चे का दूसरे के कॉम्पटिशन है. ऐसे हालात में रहना उनकी मेंटल हेल्थ पर खराब असर डालता है. लंबे वक्त तक इसी स्थिति में रहना उनके लिए खतरनाक बन जाता है.
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