नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय व पात्रता प्रवेश परीक्षा (नीट) में सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 साल निर्धारित करने के भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) के मानदंडों को चुनौती देने वाली याचिका पर मंगलवार को केन्द्र को नोटिस जारी किया है.

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न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अवकाशकालीन पीठ ने मेडिकल के प्रवेश के इच्छुक 170 छात्रों के समूह की याचिका पर केन्द्र, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और केरल सरकार को नोटिस जारी किये. न्यायालय इस मामले में अब 10 जुलाई को सुनवाई करेगा. मेडिकल के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक छात्रों के इस समूह ने मेडिकल चिकित्सा परिषद द्वारा सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 25 साल और आरक्षित वर्ग के लिए 30 साल निर्धारित करने वाली अधिसूचना के खिलाफ याचिकायें खारिज करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के 11 मई के आदेश को चुनौती दी है.

25 साल की आयु सीमा पूरी तरह मनमानी
हालांकि, उच्च न्यायालय ने पत्राचार या निजी पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस प्रवेश परीक्षा में शामिल होने से वंचित करने संबंधी प्रावधान निरस्त कर दिया था. न्यायालय में इस मामले में संक्षिप्त सुनवाई के दौरान छात्रों के समूह के वकील ने कहा कि 25 साल की आयु सीमा पूरी तरह मनमानी है. एमसीआई की 22 जनवरी की अधिसूचना के अनुसार मुक्त विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले वे छात्र जिन्होंने जीव विज्ञान या बायो प्रौद्योगिकी को अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाई की है वे इसमें आवेदन करने के पात्र नहीं है.

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11वीं व 12 वीं में दो साल से अधिक समय लेने वाले पात्र नहीं
इसी तरह जिन छात्रों ने निजी रूप में अध्ययन में 11 वीं और 12 वीं की पढ़ाई पूरी करने में दो साल से अधिक समय लिया है वे भी इसके पात्र नहीं है. उच्च न्यायालय ने 28 फरवरी को अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया था कि अभ्यर्थियों को इस प्रवेश परीक्षा के लिये आवेदन करने की अनुमति देने का मतलब यह नहीं है कि वे छह मई को होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. उच्च न्यायालय ने नीट की परीक्षा में शामिल होने की पात्रता के मानदंडों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर अपना फैसला दिया था.