नई शिक्षा नीति 2020: नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की आम तौर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है और अनेक विशेषज्ञों ने इसे बहुप्रतीक्षित और महत्वपूर्ण सुधार बताया है जबकि कुछ शिक्षाविदों ने इसके काफी विस्तृत होने का जिक्र करते हुए कहा कि इन्हें जमीन पर उतारने की जरूरत है. Also Read - New Education Policy 2020: रमेश पोखरियाल NEP पर चर्चा करने के लिए सोमवार को सोशल मीडिया पर होंगे लाइव 

नई शिक्षा नीति में पांचवी कक्षा तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई, बोर्ड परीक्षा के भार को कम करने, विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने की अनुमति देने, विधि और मेडिकल को छोड़कर उच्च शिक्षा के लिये एकल नियामक बनाने, विश्वविद्यालयों के लिये साझा प्रवेश परीक्षा आयोजित करने सहित स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक अनेक सुधारों की बात कही गई है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी . Also Read - Independence Day 2020: शिक्षा मंत्रालय और MyGov स्कूली छात्रों के लिए आयोजित कर रहा है निबंध प्रतियोगिता, जानें पार्टिसिपेट से जुड़ी तमाम बातें   

आईआईटी दिल्ली के निदेशक रामगोपाल राव ने नई नीति को भारत में उच्च शिक्षा के लिये ‘‘मोरिल घटना’’ करार दिया . मोरिल लैंड ग्रांट एक्ट अमेरिका का विधान है जिसके माध्यम से अमेरिका में भूमि अनुदान कालेज खोलने की अनुमति दी गई है. उन्होंने कहा कि सभी मंत्रालयों की सहभागिता से राष्ट्रीय शोध कोष के सृजन से हमारा अनुसंधान प्रभावी होगा और समाज में इसका असर दिखेगा . Also Read - New Education Policy 2020: पीएम मोदी ने कहा- 21वीं सदी के नए भारत की बुनियाद बनेगी यह शिक्षा नीति

आईआईएम संभलपुर के निदेशक महादेव जायसवाल ने कहा कि 10+2 प्रणाली से 5+3+3+4 प्रणाली की ओर बढ़ना अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मानदंडों के अनुरूप है. उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे आईआईएम और आईआईटी के ढांचे छोटे होने के कारण काफी प्रतिभा होने के बावजूद वे दुनिया के शीर्ष 100 संस्थानों की सूची मे नहीं आ पाते हैं. तकनीकी संस्थानों के बहुआयामी बनने से आईआईएम और आईआईटी को मदद मिलेगी. ’’

दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दिनेश सिंह ने कहा कि यह नीति कौशल और ज्ञान के मिश्रण से स्वस्थ्य माहौल सृजित करेगी. उन्होंने कहा कि नीति में कुछ ऐसे सुधार हैं जिनकी लम्बे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी. यह विभिन्न संकाय और विषयों के संयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी और इससे पठन-पाठन एवं विचारों तथा वास्तविक दुनिया में इनके उपयोग को बढ़ावा मिलेगा.

ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन की महानिदेशक रेखा सेठी ने कहा, ‘‘नई शिक्षा नीति शिक्षा के क्षेत्र में आपूर्ति और देश में उच्च शिक्षा के नियमन संबंधी जटिलताओं को दूर करेगी और सभी छात्रों के लिये समान अवसर प्रदान करेगी. कोविड-19 के बाद के समय में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का कदम महत्वपूर्ण है.’’ बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज के अरोड़ा ने कहा कि यह प्रगतिशील और आगे की ओर बढ़ने वाली नीति है. यह देश में उच्च शिक्षा के आयामों को बदलने वाला है .

शिव नाडर विश्वविद्यालय की कुलपति रूपामंजरी घोष ने कहा कि नीति में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार की बात कही गई है लेकिन इसके विस्तार को जमीन पर कैसे और कितना उतारा जाता है, यह देखना होगा. उन्होंने कहा कि सुधार की सच्ची भावना देश के छात्रों के सशक्तीकरण में निहित होती है ताकि वे अपनी पूरी क्षमता को प्राप्त कर सकें. हेरिटेज स्कूल के निदेशक विष्णु कार्तिक ने कहा कि नीति में इस बात का ध्यान होना चाहिए कि सुधार इनपुट आधारित होने की बजाए परिणाम आधारित हो.