नई दिल्ली: नई शिक्षा नीति (NEP) पर के. कस्तूरीरंगन समिति द्वारा तैयार मसौदा रिपोर्ट में जो प्रमुख सिफारिशें की गई हैं, उसमें 8वीं कक्षा तक हिन्दी को अनिवार्य करने की सिफारिश भी शामिल है. दरअसल, मसौदा रिपोर्ट में यह कहा गया है कि पहली से 8वीं कक्षा तक हिन्दी को अनिवार्य विषय की श्रेणी में रखा जाए.

वर्तमान में गैर-हिन्दी भाषी राज्यों, जैसे कि तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा, पश्चिम बंगाल और असम के स्कूलों में हिन्दी को अनिवार्य विषय के रूप में नहीं पढ़ाया जाता. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार NEP का उद्देश्य देश के स्कूलों में भारत केंद्रित और वैज्ञानिक प्रणाली को लागू करना है. रिपोर्ट के अनुसार NEP सिफारिशों में एक यह भी शामिल है कि 5वीं कक्षा तक छात्रों के लिए क्षेत्रीय भाषा, जैसे कि अवधी, भोजपुरी, मैथली आदि में सिलेबस विकसित किए जाएं.

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इस पर HRD मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि कोई भी भाषा अनिवार्य नहीं की जा रही है.

जावड़ेकर ने अपने ट्वीट में कहा है कि नई शिक्षा नीति संबंधी समिति ने अपनी मसौदा रिपोर्ट में किसी भी भाषा को अनिवार्य बनाने की सिफारिश नहीं की गई है. इस भ्रामक रिपोर्ट पर मीडिया के एक वर्ग का स्पष्टीकरण आवश्यक है.

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