नई दिल्ली: पिछले एक दशक से तुलना करें तो निश्चित तौर पर स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में इजाफा हुआ है. पर एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में इन बच्चों की योग्यता और ज्ञान पर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं. रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 8वीं कक्षा से पास होने वाले अधिकांश छात्रों को बेसिक मैथ्स तक नहीं आती, जबकि उनमें से एक चौथाई छात्र पढ़ने में भी असमर्थ हैं.

गैर सरकारी संगठन ‘प्रथम’ ने अपनी रिपोर्ट ‘एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट’ (ASER) में यह खुलासा किया है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान स्कूल जाने वाले छात्रों की संख्या में इजाफा हुआ है, लेकिन इनमें अधिकांश छात्र ऐसे हैं, जो सामान्य गणित के सवाल को हल नहीं कर पाते या रीडिंग नहीं कर पाते. मसलन, सर्वेक्षण के दौरान 8वीं कक्षा के छात्रों को तीन अंकों के भाग (Division) के सवाल दिए गये, जिसे उन्हें एक अंक से भाग करना था. 8वीं कक्षा के सिर्फ 44 प्रतिशत छात्रों ने ही सवालों को बिल्कुल सही-सही हल किया. जबकि 56 फीसदी छात्रों ने गलत जवाब दिए.

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वहीं, 5वीं कक्षा के 72% छात्र भाग के सवाल नहीं कर सकते और कक्षा 3 के 70 प्रतिशत छात्रों को घटाव नहीं आता.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक दशक पहले जो तस्वीर थी, उसकी तुलना में आज की स्थिति ज्यादा खराब हो गई है. साल 2008 में 5वीं कक्षा के 37% छात्रों को बेसिक मैथ्स आती थी. वहीं आज 28% से कम छात्र बेसिक मैथ्स के सवाल हल कर पाते हैं. साल 2016 के आंकड़ों की मानें तो 5वीं कक्षा के 26% छात्रों को ही बेसिक मैथ्स आती है.

राष्ट्रीय स्तर पर 8वीं पास करने वाले हर चार में से एक छात्र को पढ़ना नहीं आता यानी रीडिंग नहीं आती. हालांकि कुल मिलाकर देखा जाए तो पढ़ाई में लड़कों की तुलना में लड़कियों का प्रदर्शन अच्छा है, लेकिन अंकगणित में वह लड़कों से पिछती नजर आ रही हैं.

सर्वेक्षण के दौरान जहां 50 फीसदी लड़के गणित के सवाल हल करने में सफल रहे, वहीं सिर्फ 44 फीसदी लड़कियां ही अंकगणित के सवाल हल कर पाईं. हालांकि हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में लड़कियों का प्रदर्शन अच्छा है.

यह रिपोर्ट तैयार करने के लिए सर्वेक्षण में 28 राज्यों के 596 ग्रामीण जिलों के 3.5 लाख घरों और 5.5 लाख छात्रों को शामिल किया गया. स्टडी में सिर्फ 3 से 16 साल के छात्रों को ही शामिल किया गया है.

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