NLAT Exam 2020: सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल लॉ स्कूल इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु को शेड्यूल के अनुसार NLAT 2020 की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी है. हालाँकि, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक अदालत परीक्षा की वैधता पर फैसला नहीं कर देती, तब तक रिजल्ट घोषित न करें. सुप्रीम कोर्ट नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के पूर्व कुलपति, प्रोफेसर वेंकट राव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था. प्रोफेसर वेंकट राव नेशनल लॉ एप्टीट्यूड टेस्ट (NLAT) आयोजित कराने के फैसले को लेकर कोर्ट में चुनौती दी थी. Also Read - No Parking No Car: दिल्ली मे कार लेने से पहले दिखाने होंगे पार्किंग के सबूत वरना नई कार के लिए करना पड़ेगा 15 साल का इंतजार

NLSIU इस साल से एक अलग लॉ एडमिशन टेस्ट आयोजित करेगा. कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT 2020) की जगह NLAT 2020 परीक्षा आयोजित करने के कदम को इस याचिका में चुनौती दी है. इस मामले की सुनवाई जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की खंडपीठ कर रही है. प्रो राव और एक अभिभावक की ओर से एडवोकेट सुघोष सुब्रमण्यम और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड विपिन नायर द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया है कि वर्तमान कुलपति प्रो सुदेश कृष्णस्वामी का एक अलग टेस्ट करने का निर्णय NLSIU को “उत्कृष्टता का द्वीप ” से “बहिष्कार का द्वीप ” में बदल देगा. Also Read - प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए पर्याप्त नियमन मौजूद, डिजिटल मीडिया का नियमन पहले हो: केंद्र

इस दलील में याचिकाकर्ताओं ने कहा कि NLSIU के पास वैकल्पिक प्रवेश प्रक्रिया (यानी NLAT) विकसित करने की कोई शक्तियां नहीं थी. कार्यकारी बैठक जिसमें यह कहा गया है कि NLSIU को इस तरह की वैकल्पिक भविष्यवाणी विकसित करने के लिए अधिकृत किया गया था, जो कि कानून द्वारा अवैध और बिना आधार के है. याचिका में कहा गया है कि NLSIU द्वारा अपनी प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय एकतरफा था और जल्दबाजी में लिया गया. इस आशय के लिए जारी अधिसूचना ने यह भी सूचित किया था कि NLSIU इस वर्ष अपने कानून कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए CLAT स्कोर स्वीकार नहीं करेगा. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने टीवी शो पर लगाई फटकार, कहा- अन्य नागरिक के जैसा है पत्रकार, अमेरिका की तरह कोई अलग से स्वतंत्रता नहीं