Tuition Fee Waiver: दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की गई जिसमें आम आदमी पार्टी सरकार को कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान कक्षाएं नहीं लगने के कारण राष्ट्रीय राजधानी के स्कूलों द्वारा ली गई ट्यूशन फीस को माफ करने के लिए कदम उठाने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया है. याचिका में अप्रैल से ट्यूशन फीस लौटाने का अनुरोध भी किया गया है जिनकी अदायगी अभिभावक कर चुके हैं. Also Read - दिल्ली सरकार ने एम्स में भर्ती दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के परिजनों को 10 लाख रुपये की मदद दी

मुख्य न्यायाधीश डी एच पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने शुक्रवार को मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद इसे चार अगस्त के लिये सूचीबद्ध कर दिया. इससे पहले दिल्ली सरकार के स्थाई वकील रमेश सिंह ने पीठ से कहा कि उच्च न्यायालय इस वर्ष अप्रैल में इसी तरह के एक मामले को देख चुका है. याचिकाकर्ता नरेश कुमार के वकील ने यह पता लगाने के लिए वक्त मांगा कि क्या याचिका में उठाए गए मुद्दों पर उच्च न्यायालय अप्रैल में गौर का चुकी है. Also Read - Electric Vehicle Policy: दिल्ली में लागू हुई इलेक्ट्रिक वाहन नीति, जानें इससे जुड़े नुकसान और फायदे

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने के लिए शिक्षिकों को भुगतान करना होता है साथ ही ऐसी कक्षाओं को चलाने के लिए उपकरणों, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी जरूरी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना पड़ता है. अधिवक्ता एन प्रदीप शर्मा ने याचिकाकर्ता की पैरवी की. पीठ ने याचिकाकर्ता से जानना चाहा अगर स्कूल कहते हैं कि ऑन लाइन कक्षाएं आयोजित करने की कीमत सामान्य कक्षाएं आयोजित करने की तुलना में अधिक हैं तो क्या वह ज्यादा फीस देने के लिए तैयार हैं. Also Read - DU Open Book Exam: हाई कोर्ट ने डीयू को परीक्षा आयोजित कराने की दी मंजूरी, जानें कब से शुरू होगा एग्जाम

याचिकाकर्ता ने याचिका में दिल्ली सरकार के 17 अप्रैल की उस अधिसूचना को भी चुनौती दी जिसमें स्कूलों को केवल ट्यूशन फीस लेने की अनुमति दी गई थी.