Quad Meeting 2022 Virtual Meeting Today Pm Narendra Modi Joe Biden And Other Leaders Participate In Quad Meeting Russia Ukraine War
Quad Meeting 2022: यूक्रेन संकट के बीच क्वाड की बैठक, पीएम नरेंद्र मोदी और बाइडन होंगे शामिल
प्रधानमंत्री फूमी किशिंदा व ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन भी शामिल होंगे. बता दें कि क्वाड चार देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का संयुक्त ग्रुप है. इस मीटिंग के मद्देनजर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी साझा की.
Quad Meeting 2022: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध (Russia Ukraine War) के बीच गुरुवार यानी आज क्वाड के नेताओं की वर्चुअल मीटिंग होने वाली है. इस मीटिंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होने वाले हैं. इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापान के प्रधानमंत्री फूमी किशिंदा व ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन भी शामिल होंगे. बता दें कि क्वाड चार देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का संयुक्त ग्रुप है. इस मीटिंग के मद्देनजर भारतीय विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी साझा की. मंत्रालय ने कहा कि चारों नेता एशिया प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर अपने विचार साझा करेंगे.
क्वाड नेता संगठन के एजेंडा के मुताबिक की गई पहल के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेंगे. बता दें कि पूर्व में क्वाड के समकाली व सकारात्मक एजेंडे को लेकर चारों नेताओं ने पहल की थी. सितंबर 2021 में वशिंगटन में क्वाड नेता व्यक्तिगत रूप से मिले थे. इसके बाद आज शिखर सम्मेलन ऑनलाइन माध्यम से होने जा रहा है.
क्या है क्वाड
दरअसल हिंद महासागर में साल 2007 में आई सुनामी के बाद भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने राबत प्रयासों में सहयोग के लिए अनौपचारिक गठबंधन बनाया था. इस गठबंधन में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया (QUAD Countries) शामिल हैं. बता दें कि ये चारों देश विश्व में अपनी आर्थिक व सैन्य ताकत के लिए जाना जाता है. विशेषज्ञों को मानें तो इसे चीन की विस्तारवादी नीति व उसके पॉलिसी को काउंटर करने के लिए औपचारिक किया गया और लगातार इन चारों देशों के नेता मीटिंग करते हैं. बता दें कि साल 2007 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इसे क्वाड्रीलैट्रल सिक्योरिटी डॉयलॉग या क्वाड का औपचारिक रूप दिया था.
इस ग्रुप का मकसद नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था स्थापित करना है. हालांकि इसके केंद्र में चीन है. दरअसल चीन की उग्र नीतियों व प्रशांत और हिंद महासागर में सहयोग बनाए रखने को लेकर भी इस ग्रुप
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