Success Story: डिप्रेशन के चलते छोड़नी पड़ी प्रीलिम्स, लेकिन नहीं हारी हिम्मत, अगले ही साल बन गईं IAS

IAS Success Story: क्या डिप्रेशन से जूझते हुए भी सफलता पाई जा सकती है? अलंकृता पांडे की कहानी इस सवाल का जवाब है, जिन्होंने डिप्रेशन के चलते प्रीलिम्स छोड़ा, लेकिन अगले साल IAS बनकर मिसाल कायम की.

Published date india.com Published: December 13, 2024 3:46 PM IST
Alankrita Pandey Success Story
आईएएस सक्सेस स्टोरी

IAS Success Story: कानपुर की रहने वाली अलंकृता पांडे का यूपीएससी का सफर आसान नहीं था. 2014 में जब उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, तो जीवन ने उन्हें एक गंभीर चुनौती दी. निजी समस्याओं के कारण वह डिप्रेशन में चली गईं और इस स्थिति ने उन्हें मानसिक रूप से काफी कमजोर कर दिया. इस कठिन समय में, अलंकृता ने थेरेपी और परिवार के समर्थन से खुद को संभालने की कोशिश की. लेकिन, इस संघर्ष के कारण उन्हें 2014 की यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा छोड़नी पड़ी.

धैर्य और मेहनत से मिली सफलता

डिप्रेशन से उबरने के बाद, अलंकृता ने अपने सपनों को नई ऊर्जा के साथ पूरा करने का संकल्प लिया. उन्होंने एक ठोस योजना के साथ पढ़ाई शुरू की और दिन-रात मेहनत की. 2015 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 85वीं रैंक हासिल कर ली. उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें 2016 के आईएएस बैच में शामिल कर दिया. यह उनकी मेहनत, धैर्य और लगन का परिणाम था, जिसने उनकी सफलता को संभव बनाया.

इंजीनियरिंग से आईएएस तक का सफर

अलंकृता ने इलाहाबाद के MNNIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में काम किया. हालांकि, उन्होंने महसूस किया कि उनका असली लक्ष्य देश की सेवा करना है. यूपीएससी की तैयारी के दौरान, वह रोजाना आठ घंटे पढ़ाई करती थीं. इस मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने खुद को परीक्षा के हर चरण के लिए तैयार किया.

एक प्रेरणा बनीं अलंकृता

अलंकृता पांडे की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो जीवन की कठिनाइयों से हार मान लेते हैं. उन्होंने साबित किया कि यदि मन में सच्चा विश्वास और मेहनत करने की ताकत हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है. आज, अलंकृता आईएएस अधिकारी के रूप में देश सेवा कर रही हैं और अपने कार्यों से दूसरों को प्रेरित कर रही हैं. उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है.

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