Success Story: खाने के लिए भी नहीं थे पैसे, पिता की मौत के बाद भी नहीं मानी हार, ऐसे क्रैक की UPPSC

Success Story: इज्या तिवारी की कहानी संघर्ष और दृढ़ता की मिसाल है. पिता की मौत और आर्थिक तंगी के बावजूद, उन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष से UPPSC की परीक्षा पहले प्रयास में पास की.

Published date india.com Published: November 21, 2024 7:00 AM IST
Success Story of Ijya Tiwari
सक्सेस स्टोरी

कन्नौज जिले की ए.आर.टी.ओ इज्या तिवारी की कहानी प्रेरणा का एक बेहतरीन उदाहरण है. इज्या का जीवन संघर्षों से भरा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. 12 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया था. पिता की बीमारी और मौत के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई थी, और एक वक्त ऐसा आया जब घर में खाने के लिए भी पैसे नहीं थे। बावजूद इसके, इज्या ने अपनी मां को सहारा दिया और कठिनाइयों का सामना करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी.

पहले प्रयास में सफलता

इज्या तिवारी ने अपनी मेहनत और लगन से न केवल खुद को आगे बढ़ाया, बल्कि अपनी मां को भी शिक्षा की ओर प्रेरित किया. 2014 में बैंक में नौकरी पाने के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी. बैंक की नौकरी के बाद रात को 9 बजे से 2-3 बजे तक पढ़ाई करतीं और दिन में अपने परिवार का ध्यान रखतीं. उनकी कठिन मेहनत का फल उन्हें 2018 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की परीक्षा में पहले प्रयास में ही सफलता के रूप में मिला. इज्या की सफलता ने यह साबित किया कि इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं होती.

संघर्षों से मिली प्रेरणा

इज्या की कहानी केवल उनकी सफलता की नहीं, बल्कि एक बेटी की अपनी मां के लिए संघर्ष की भी है. पिता की मृत्यु के बाद मां के मानसिक संतुलन को ठिकाने लाना इज्या के लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी मां को भी ग्रैजुएशन की पढ़ाई कराई और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. इज्या की यह कहानी हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे जितनी भी कठिनाइयाँ आएं, अगर आत्मविश्वास और मेहनत का साथ मिले तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है.

छात्रों के लिए संदेश

इज्या तिवारी का मानना है कि छात्रों को अपनी पढ़ाई में समय का सही उपयोग करना चाहिए. वह बताती हैं कि अगर आप पूरी मेहनत और लगन से काम करते हैं, तो किसी भी परिस्थिति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने खुद की पढ़ाई को अपनी ज़िंदगी की प्राथमिकता बनाई और काम के साथ-साथ 5-6 घंटे लगातार पढ़ाई की. उनके अनुसार, किसी भी परिस्थिति में निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मेहनत के साथ सफलता जरूर मिलती है.

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