नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने तमिल भाषा में नीट की परीक्षा देने वाले छात्रों को 196 कृपांक देने के मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ के आदेश पर शुक्रवार को रोक लगा दी. न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने सीबीएसई की याचिका पर हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के साथ ही नोटिस जारी किया.

पीठ ने इस मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करते हुये पक्षकारों से कहा कि वे इस स्थिति से निबटने के सुझाव दें. पीठ ने कहा, ‘‘हम इस तरह से अंक नहीं दे सकते हैं.’’ पीठ ने टिप्पणी की कि ऐसा लगता है कि इस फैसले के बाद तमिल भाषा में परीक्षा देने वाले छात्र दूसरे छात्रों की तुलना में लाभ की स्थिति में हैं.

हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने 10 जुलाई को सीबीएसई को आदेश दिया था कि नीट की परीक्षा में क्षेत्रीय भाषा का चयन करने वाले छात्रों को 49 प्रश्नों के तमिल में अनुवाद में गलतियों के सिलसिले में प्रत्येक सवाल के लिए चार अंक के हिसाब से 196 अंक प्रदान किये जायें.

मद्रास हाई कोर्ट ने तमिल भाषा में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों को 196 ग्रेस मार्क्स देने का आदेश दिया था. कोर्ट ने CBSE को NEET की रिवाइज्ड रैंक लिस्ट जारी करने का भी निर्देश दिया था. दूसरी ओर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कहना है कि NEET बुलेटिन में यह स्पष्ट कहा गया है कि रीजनल भाषाओं में परीक्षा देने वाले परीक्षार्थियों को बाई-लिंगुअल प्रश्न पत्र दिए जाएंगे. सवालों का ट्रांसलेशन रीजनल भाषा में यदि गलत होता है तो छात्र इंग्लिश वर्जन को देख सकते हैं और अंग्रेजी के प्रश्नपत्र को ही फाइनल माना जाएगा. CBSE इसे ही आधार बनाकर सर्वोच्च न्यायालय पहुंच गया था.