UGC Guidelines 2020: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ग्रेजुएट बैचों के लिए अंतिम सेमेस्टर (या अंतिम वर्ष) परीक्षा को रद्द करने की सिफारिश नहीं करने का फैसला किया है और संस्थानों को सितंबर के अंत तक इन परीक्षाओं का संचालन करने की सलाह दी है. सोमवार को हुई बैठक में नियामक ने कहा कि ये परीक्षा ऑनलाइन, ऑफलाइन या दोनों मोड में आयोजित की जा सकती है. Also Read - School Reopen Latest News: अगले महीने से फिर से खुल सकते हैं स्कूल, कॉलेजों में नहीं होगी इस साल जीरो ईयर, जानें पूरी डिटेल

सोमवार देर शाम जारी एक प्रेस बयान में यूजीसी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को आयोजित करने के बारे में निर्णय लेने के लिए सलाह दिया था. यूजीसी ने कहा कि विश्व स्तर पर छात्रों की शैक्षणिक विश्वसनीयता, कैरियर के अवसरों और भविष्य की प्रगति सुनिश्चित करने के लिए लिया गया था. शैक्षणिक मूल्यांकन हर शिक्षा प्रणाली में एक बहुत महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. परीक्षाओं में प्रदर्शन छात्रों को आत्मविश्वास और संतुष्टि देता है और यह क्षमता, प्रदर्शन और विश्वसनीयता का प्रतिबिंब है जो वैश्विक स्वीकार्यता के लिए आवश्यक है. Also Read - ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रुजुएशन की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं होंगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट आज करेगा फैसला

अंतिम सेमेस्टर या अंतिम वर्ष की परीक्षा के लिए उपस्थित होने के लिए विश्वविद्यालय सितंबर के बाद एक विशेष परीक्षा आयोजित करेगा. बैकलॉग के साथ अंतिम वर्ष के छात्रों को एक परीक्षा के माध्यम से अनिवार्य रूप से मूल्यांकन किया जाएगा. इससे पहले दिन में गृह मंत्रालय ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी है और कहा कि “अंतिम रूप से परीक्षाएं यूजीसी दिशानिर्देशों के अनुसार अनिवार्य रूप से आयोजित की जानी हैं.” Also Read - New Education Policy 2020: रमेश पोखरियाल NEP पर चर्चा करने के लिए सोमवार को सोशल मीडिया पर होंगे लाइव 

उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए 29 अप्रैल को जारी ‘सांकेतिक वैकल्पिक कैलेंडर’ को फिर से जारी करने के लिए नियामक द्वारा सोमवार की बैठक आयोजित की गई थी. सांकेतिक कैलेंडर ने निर्धारित किया था कि विश्वविद्यालय 1 जुलाई से 15 जुलाई तक अंतिम-वर्ष या अंतिम-सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करेंगे और महीने के अंत तक रिजल्ट घोषित किए जाएंगे. हालांकि 24 जून को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश में बढ़ते कोविड मामलों के मद्देनजर यूजीसी को अपने परीक्षाओं और अकादमिक कैलेंडर को लेकर विश्वविद्यालयों के लिए दिशानिर्देशों का अवलोकन करने के लिए कहा था.

हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति आर सी कुहाड़ की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित थे, इसलिए उच्च शिक्षा नियामक ने समीक्षा के लिए मंत्रालय के अनुरोध को वापस पैनल में भेज दिया. सोमवार के फैसले भी कुहाड़ समिति के सुझावों पर आधारित थे. सूत्रों के अनुसार कुहाड़ समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि स्नातक छात्रों के लिए नया शैक्षणिक सत्र नवंबर के पहले सप्ताह में और दिसंबर के पहले सप्ताह में पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों के लिए शुरू होना चाहिए, लेकिन आज की बैठक के दौरान इस पर ध्यान नहीं दिया गया.

यूजीसी के संशोधित दिशानिर्देशों का देश भर में परीक्षा शेड्यूल पर प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में जो इस मुद्दे पर नियामक के रुख का इंतजार कर रहे थे. हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसे में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, ओडिशा और मध्यप्रदेश राज्य अब उच्च शिक्षा में सभी परीक्षाओं को रद्द करने के अपने फैसले पर दोबारा गौर करेंगे.