नई दिल्ली: यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) ने हायर एजुकेशन के छात्रों को राहत देते हुए एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा है कि दाखिले के लि वास्तविक दस्तावेज अनिवार्य नहीं हैं. कोई भी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट एडमिशन कंफर्म होने से पहले छात्र के वास्तविक दस्तावेजों को रोक नहीं सकता. Also Read - Final Year Exam: UGC गाइडलाइंस के तहत राजस्थान में इस महीने में होगी परीक्षा, सीएम गहलोत ने दिए ये संकेत

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यानी अब साल 2019-2020 से विद्यार्थियों को अपने दस्तावेजों की मूल प्रति जैसे की मार्कशीट्स व अन्य सर्टिफिकेट्स शिक्षण संस्थान में दाखिला लेते समय नहीं जमा करवाना पड़ेगा. नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि 5000 से ज्यादा फीस जमा की है और वह दाखिले से अपना नाम वापस लेना चाहता है तो इंस्टीट्यूट को फीस की रकम पूरी या आंशिक वापस करनी होगी. Also Read - IPU Exams 2020: GGSIPU सितंबर के चौथे सप्ताह में आयोजित करेगा फाइनल ईयर का एग्जाम, इस दिन जारी होगा डेटशीट

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मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि हर साल एडमिशन से जुड़ी कई शिकायतेंं आ रही हैं. ऐसे में छात्रों द्वारा की जा रही शिकायतों के मद्देनजर यह कदम उठाया जा रहा है. प्रकाश जावडेकर ने कहा कि अब छात्रों को एडमिशन कंफर्म होने तक अपने वास्तविक दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि मेरिट लिस्ट बदल सकते हैं और छात्रों के पास बेहतर कॉलेज में स्विच करने का पूरा अधिकार है.

नोटिफिकेशन के अनुसार अब छात्रों को एडमिशन फॉर्म जमा करते समय ओरिजनल सर्टिफिकेट, जैसे कि मार्कशीट, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट आदि जमा करने की जरूरत नहीं होगी. छात्रों को अपना ओरिजनल सर्टिफिकेट सिर्फ वेरिफिकेशन के वक्त दिखाना होगा और वेरिफिकेशन हो जाने के तुरंत बाद ही छात्रों को उनका सर्टिफिकेट लौटा दिया जाएगा. कोई भी संस्थान अपने पास छात्रों के वास्तविक दस्तावेज नहीं रख सकता.

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HRD मंत्री ने कहा कि दाखिले की आखिरी तारीख से 15 दिन पहले यदि छात्र अपना नाम कॉलेज से वापस लेना चाहता है तो उसे जमा की गई फीस की पूरी राशि वापस की जाएगी. जावड़ेकर ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान अगर दाखिला वापस लेने वाले विद्यार्थियों को उनकी फीस नहीं लौटाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. अब से किसी भी शिक्षण संस्थान को विद्यार्थियों के दस्तावेजों की मूल प्रति रखने का अधिकार नहीं होगा.

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