UGC Warns Universities: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों को अपने फैकल्टी मेंबरों के मूल दस्तावेजों को सेवा अनुबंधों की पेशकश के बाद बनाए रखने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा है कि अक्सर उन्हें वापस लेने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और परिणामस्वरूप कई लोगों को बेहतर नौकरी की संभावनाएं से भी वंचित रहना पड़ता है. एक विज्ञप्ति में UGC के सचिव रजनीश जैन ने कहा कि यह उनके संज्ञान में आया है कि कई विश्वविद्यालय, कॉलेज शिक्षकों को अनुबंध जारी करने के समय मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, मार्कशीट आदि एकत्र करते हैं और फिर इन दस्तावेजों को अपने पास रख लेते हैं. Also Read - CBSE Compartment Exam 2020: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE, UGC से कहा- छात्रों का कैरियर नुकसान न हो, इसके लिए उठाएं उचित कदम

उच्च शिक्षा नियामक ने कहा, “जब वे नौकरी छोड़ते हैं तो शिक्षक अपने नियोक्ता शैक्षणिक संस्थानों से अपने दस्तावेजों को प्राप्त करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. कई लोगों को अपनी बेहतर संभावनाओं से हाथ धोना पड़ता है क्योंकि वे समय पर अपने दस्तावेजों को पुनर्प्राप्त करने में सक्षम नहीं होते हैं.” इसमें कहा गया है कि UGC ने इन मामलों पर गंभीरता से विचार किया है और इस बात पर जोर दिया है कि कोई भी उच्च शिक्षण संस्थान अपने शिक्षकों का पोजेशन सर्टिफिकेट या मूल दस्तावेजों को अपने कब्जे में नहीं रखना चाहिए, जो उन्हें उनके अधिकारों से वंचित करता है. नियामक ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को “अनिवार्य रूप से” जारी करने के लिए कहा है कि रोजगार अनुबंध स्पष्ट रूप से UGC और अन्य वैधानिक निकायों के निर्धारित मानदंडों के अनुसार सभी नियमों और शर्तों को निर्दिष्ट किया जाए. Also Read - Final Year Exam: इस यूनिवर्सिटी का घर बैठे दे सकते हैं फाइनल ईयर का एग्जाम, परीक्षा के लिए दिए जाएंगे 3 घंटे का समय

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE), तकनीकी शिक्षा नियामक ने भी पिछले साल इसी तरह की चेतावनी जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि संस्थान शिक्षकों और छात्रों के प्रमाणपत्रों को अपने पास रखे हुए हैं. यह उल्लेख किया गया था कि यह मानदंडों के खिलाफ था और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी. AICTE ने फैकल्टी मेंबरों से कहा कि वे छात्रों के शैक्षणिक हित को ध्यान में रखते हुए मध्य सत्र में नौकरी छोड़ते हुए कम से कम एक महीने का नोटिस दें. Also Read - New Education Policy 2020: शिक्षा मंत्री ने कहा- नई शिक्षा नीति राष्ट्र की प्रगति में निभाएगी भूमिका, इसकी लहर हर कोने तक पहुंचेगी