नई दिल्ली: सीबीआई ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि कथित सेक्स सीडी मामले में जहां छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आरोपी हैं, उसे दिल्ली ट्रांसफर किया जाए. सीबीआई का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ के सामने पेश किया कि इस मामले से जुड़े कुछ गवाहों को धमकी दी जा रही है, क्योंकि एक आरोपी छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री प्रभावशाली व्यक्ति है. Also Read - क्या उत्तराखंड में सीएम को बदला जाएगा? बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कही ये बात

उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से संबंधित कथित सेक्स सीडी मामला राज्य से बाहर स्थानांतरित करने के लिए  केन्द्रीय जांच ब्यूरो की याचिका पर 11 फरवरी को विचार किया जाएगा. Also Read - Debashree Bhattacharya Joins BJP: एक्ट्रेस देबाश्री भट्टाचार्य बीजेपी में शामिल, TMC को कहा अलविदा

न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा, मामलों को अंतिम निपटान के लिए 11.02.2021 को सूचीबद्ध करें. पार्टियों के लिए वकील इस बीच में सिफारिशों को पूरा कर सकते हैं. सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि कुछ गवाह दिल्ली और बंबई के हैं और उन्होंने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि वे मुकदमे को छत्तीसगढ़ से बाहर, दिल्ली शिफ्ट करें. Also Read - नंदीग्राम: BJP ने ममता बनर्जी के सामने शुवेंदु अधिकारी को उतार चला बड़ा दांव, किसका पलड़ा रहेगा भारी, जानें समीकरण

शीर्ष अदालत ने सीबीआई मामले में गवाह होने का दावा करने वाले रसजीत सिंह खनूजा की याचिका पर भी विचार किया और कहा कि राज्य सरकार ने आत्महत्या के लिये उकसाने के किसी अन्य प्रकरण में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है.खनूजा ने भी आत्महत्या के लिये उकसाने का मामला सीबीआई को सौंपने का अनुरोध न्यायालय से किया है.

राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और अधिवक्ता सुमीर सोंढी ने खनूजा की याचिका का विरोध किया और कहा कि यह अनुच्छेद 32 के तहत दायर की गयी है जिसे खारिज किया जाना चाहिए. शीर्ष अदालत ने 21 अक्टूबर, 2019 को, बघेल के एक आरोपी के रूप में शामिल होने संबंधी कथित सेक्स सीडी कांड की सुनवाई पर रोक लगा दी थी और यह मामला राज्य से बाहर स्थानांतरित करने के सीबीआई के आवेदन पर उनसे जवाब मांगा था.

सीबीआई की दलील है कि वह इस मामले को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का अनुरोध कर रही है क्योंकि अभियोजन के दो गवाहों ने शिकायत की है कि उन्हें धमकी दी गयी हैं. के्ंद्रीय जांच ब्यूरो ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष सुनवाई के लिए ही उसने यह याचिका दायर की है क्योंकि आरोपी अब राज्य का मुख्यमंत्री है और इस वजह से गवाहों को डराने धमकाने की पूरी संभावना है.

सह-आरोपी कैलाश मुरारका का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एन.एस. नादकर्णी ने कहा कि अगर छत्तीसगढ़ को याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल किया जाता है, तो यह उचित होगा, क्योंकि राज्य सरकार के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं. पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई में इस पहलू की जांच करेगी.

शीर्ष अदालत ने अक्टूबर 2019 में कथित सेक्स सीडी में आपराधिक मुकदमे पर रोक लगा दी थी और मामले को राज्य से बाहर शिफ्ट करने की सीबीआई की याचिका पर बघेल से जवाब मांगा था. सीबीआई ने इस मामले को ट्रांसफर करने की मांग की है, क्योंकि आरोपी अब मुख्यमंत्री हैं और अंदेशा है कि वह गवाहों पर दबाव डाल सकते हैं.

साल 2017 में सीबीआई ने तत्कालीन छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष रहे बघेल के खिलाफ मामला दर्ज किया था. शिकायत की गई कि बघेल ने कथित तौर पर फर्जी सेक्स सीडी मामले में तत्कालीन राज्य के पीडब्ल्यूडी मंत्री और भाजपा नेता राजेश मूणत को फ्रेम करने की कोशिश की. मूणत ने बघेल और वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा के खिलाफ उनकी छवि धूमिल करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई थी. प्रदेश की तत्कालीन बीजेपी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी थी.