नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के लिए रविवार शाम चुनाव प्रचार थम जाएगा. बीजेपी और मुख्यमंत्री रमन सिंह चौथी बार राज्य में सरकार बनाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं वहीं कांग्रेस 15 साल के सूखे को खत्म करने के लिए मैदान में है. यह पहली बार है जब कांग्रेस किसी स्थानीय नेता की जगह राहुल गांधी के चेहरे पर भरोसा कर रही है. राज्य राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ छत्तीसगढ़ में लगे पोस्टरों और होर्डिंग्स में अगर कांग्रेस के किसी नेता का चेहरा नजर आ रहा है तो वो हैं राहुल गांधी. यानी कांग्रेस अगर ये चुनाव जीतती है तो जीत का सेहरा राहुल के सिर बंधेगा लेकिन अगर कांग्रेस ये चुनाव हार जाती है तो यह राहुल की हार होगी क्योंकि भले ही कांग्रेस यह दावा करे कि वह टीम में चुनाव लड़ रही है लेकिन चेहरा तो राहुल गांधी ही हैं.
एक नवंबर 2000 को जन्मा छत्तीसगढ़ राज्य इस साल 18 साल का हो गया. अजित जोगी राज्य के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री थे. राज्य में 2003 में पहली बार चुनाव हुआ. इस चुनाव ने राज्य के राजनीतिक इतिहास को बदल दिया. बीजेपी ने राज्य में सरकार बनाई और सीएम बने रमन सिंह. तब से लेकर अब तक राज्य में विधानसभा के तीन चुनाव हुए औ तीनों में बीजेपी ने जीत दर्ज की. बीजेपी चौधी बार सरकार बनाने के लिए मैदान में है. लेकिन अब तक कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई रहती थी लेकिन पहली बार बीएसपी और कांग्रेस-छत्तीसगढ़ (जे) के साथ आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ में वोटिंग का पैटर्न क्या रहा है. और इस बार क्या हो सकता है.
जब पहली बार चुनाव हुए
पहली बार राज्य की 90 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी ने 50 सीटों पर जीत दर्ज की. पार्टी को 39.26 प्रतिशत वोट मिले. वहीं कांग्रेस ने 37 सीटें जीतें और वोट मिला 36.71 प्रतिशत. इस चुनाव में बीएसपी ने 54 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे, उसे दो सीटों पर सफलता मिली, जबकि 6.94 प्रतिशत वोट मिले. एनसीपी ने 89 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट पर जीत दर्ज की. हालांकि वोटिंग प्रतिशत के मामले में वह बीएसपी से आगे रही. उसे 7.09 प्रतिशत वोट मिले. इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर 2.55 प्रतिशत रहा.
2008 में बीजेपी का जलवा रहा बरकरार
राज्य में हुए दूसरे चुनाव में भी जनता ने बीजेपी पर फिर से भरोसा दिखाया. इस बार भी बीजेपी को 50 सीटें मिलीं और उसके वोट प्रतिशत में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली. इस बार बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़कर 40.33 प्रतिशत हो गया. कांग्रेस ने 87 सीटों पर चुनाव लड़ा उसे एक सीट का फायदा हुआ और इस बार कांग्रेस के सीटों की संख्या 37 से बढ़कर 38 हो गईं. कांग्रेस को वोट प्रतिशत का भी फायदा मिला. 2003 के चुनाव में कांग्रेस को 36.71 प्रतिशत वोट मिले थे वहीं इस बार कांग्रेस को 38.63 हो गया. बीएसपी की सीटें और वोट प्रतिशत 2003 की तरह बरकरार रहा. यानी इस बार भी बीएसपी ने 2 सीटें जीतीं और वोट प्रतिशत रहा 6.11. इस चुनाव में आरजेडी ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों सीटें अपने नाम कर लीं. बीजेपी ने भले ही 2003 की तरह अपनी सीटें बरकरार रखी हों लेकिन इस बार कांग्रेस और बीजेपी के बीच वोट का अंतर घट कर सिर्फ 1.7 प्रतिशत रह गया.
बीजेपी ने लगाई हैट्रिक
इस चुनाव में बीजेपी ने तीसरी बार अपनी जीत का परचम लहराया. बीजेपी को राज्य की 90 में से 49 सीटों पर जीत मिली. वहीं कांग्रेस की इस चुनाव में एक सीट बढ़ गई. यानी कांग्रेस के सीटों की संख्या 38 से बढ़कर 39 हो गई. वहीं बीएसपी को इस चुनाव में एक सीट से ही संतोष करना पड़ा. बीएसपी का वोट प्रतिशत भी घट गया और उसे सिर्फ 4.27 प्रतिशत वोट मिले. वहीं बीजेपी को 41.04 प्रतिशत और कांग्रेस को 40.29 प्रतिशत वोट मिले. इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का जो अंतर था वह घटकर एक प्रतिशत से भी नीचे चला गया. यानी दोनों पार्टियों के बीच वोटों का अंतर .75 प्रतिशत रह गया.
इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. अगर किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिलता है तो बीएसपी और जोगी की पार्टी कांग्रेस-छत्तीसगढ़ (जे) किंगमेकर की भूमिका में होंगी. जोगी ने एलान किया था कि वह मर जाएंगे लेकिन बीजेपी को समर्थन नहीं देंगें. वही बीएसपी प्रमुख मायावती कह चुकी हैं कि अगर गठबंधन को बहुमत नहीं मिलता है तो वह विपक्ष में बैठना पसंद करेगी.
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