दंतेवाड़ा/सुकमा: सत्तारूढ़ भाजपा और राज्य में उसकी चिर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के बीच चुनाव से पहले राजनीतिक घमासान जारी है, लेकिन पोस्टरों की एक लड़ाई नक्सलियों और चुनाव आयोग के बीच भी नक्सल प्रभावित इलाकों में चल रहा है. कुछ स्थानों पर चुनाव आयोग ने लोगों से ‘वोट पंडम’ यानी स्थानीय गोंडी भाषा में चुनाव का उत्सव मनाने को कहा है. चुनाव आयोग के इन पोस्टरों की संख्या राजनीतिक पार्टियों के पोस्टरों की संख्या से ज्यादा और आकार में बड़े हैं. इसके अलावा कई मतदान केंद्रों को मंदिर की तरह सजाया जा रहा है.

अधिकारियों का कहना है कि यहां नक्सलियों के वोट नहीं देने के प्रचार के प्रतिरोध में पोस्टर लगाए गए हैं. नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले दंतेवाड़ा और सुकमा क्षेत्र के इलाके वैसे पोस्टरों से भरे पड़े हैं जिनमें नक्सलियों ने गांव के लोगों से वोट नहीं डालने को कहा है. प्रशासन और चुनाव अधिकारी लोगों को वोट डालने के लिए कई तरह से आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने स्थानीय स्वयं सहायता समूह की उन महिलाओं को कर्ज में पांच फीसदी की छूट देने का वादा किया है जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र में दिव्यांग लोगों को मतदान बूथ तक लेकर आएंगी.

जिला कलेक्टर जय प्रकाश मौर्य ने बताया कि चुनाव पैनल संवेदनशील सुकमा के सभी 232 पोलिंग स्टेशन को मंदिर की तरह रंगने की योजना बना रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘ जिले में 40 ऐसे पोलिंग स्टेशन हैं जहां हेलीकॉप्टर, साइकिल या पैदल चलकर पहुंचा जा सकता है और इसी तरह से इन केंद्रों पर चुनाव कराने वाले एजेंट भी पहुंचेंगे. इन पोलिंग स्टेशनों में से कुछ तो ऐसे हैं जहां तक पहुंचने के लिए एजेंट को नदी तक पार करनी पड़ेगी.

मौर्य ने बताया, ‘प्रशासन चाहता है कि लोग यह महसूस करें कि वह मतदान केंद्र नहीं बल्कि एक उत्सव मनाने के लिए मंदिर आ रहे हैं. लोकतंत्र के लिए हम यहां एक युद्ध लड़ रहे हैं. वहीं सुकमा से लगे अन्य नक्सल प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा में एक और आगे का कदम उठाया गया है. यहां बेहद संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र में तीन मतदान केंद्र बनाए गए हैं. ऐसा पिछले 20 साल में पहली बार हो रहा है.

दंतेवाड़ा जिले के कलक्टर सौरभ कुमार ने बताया, ‘ तेलम, टेटम और गौतसे में पिछले 20 साल में पहली बार मतदान होगा. छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव होगा. पहले चरण का चुनाव 12 नवंबर और दूसरे चरण का चुनाव 20 नवंबर को आयोजित होगा. छत्तीगसढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए राज्य के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है. शुक्रवार को जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नक्सल प्रभावित बस्तर में चुनाव प्रचार करेंगे. वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दो दिनों में पांच सभाएं कर पार्टी के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगेंगे.