रायपुरः छत्तीसगढ़ में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई कांग्रेस की सरकार ने अपने ज्यादा से ज्यादा विधायकों को मंत्री पद देना चाहती है. तभी तो उसने मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल का आकार बढ़ाने के लिए एक शासकीय संकल्प लाया. दरअसल, मौजूदा व्यवस्था के तहत राज्य विधानसभा की कुल संख्या के केवल 15 फीसदी के बराबर ही मंत्रिमंडल का आकार हो सकता है. इस हिसाब से बघेल सरकार का मंत्रिमंडल अधिकतम 14 सदस्यीय हो सकता है, लेकिन राज्य सरकार इसे अपर्याप्त मानती है. इस कारण उसे इसे बढ़ाकर 20 फीसदी यानी अधिकतम 18 सदस्यीय करने का प्रस्ताव किया है.

इसके लिए विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संकल्प प्रस्तुत किया कि ‘यह सदन केंद्र सरकार से यह अनुरोध करता है कि राज्य के वृहद क्षेत्रफल और प्रदेश के त्वरित विकास के हित में छत्तीसगढ़ राज्य के लिए मंत्रिपरिषद के सदस्यों की संख्या 15 प्रतिशत के स्थान पर 20 प्रतिशत किए जाने हेतु संविधान के अनुच्छेद 164-1-क के प्रावधान को संशोधित करने के लिए समुचित पहल की जाए.’ मुख्यमंत्री के संकल्प प्रस्तुत करने के बाद विपक्ष के सदस्यों ने इसका विरोध किया और कहा कि मंत्रिमंडल में अधिक सदस्यों को जगह देने के लिए यह संकल्प लाया गया है. इसकी न कोई वैधता है न ही आवश्यकता है.

विपक्ष के सदस्यों ने कहा कि सरकार केवल तुष्टिकरण के लिए ऐसा कर रही है. तुष्टिकरण ने देश को हमेशा नुकसान पहुंचाया है चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो. चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ का क्षेत्रफल कुछ राज्यों से बड़ा है लेकिन यहां विधायकों की संख्या कम है. राज्य के सभी क्षेत्रों का बेहतर तरीके से विकास हो सके इसलिए यह संकल्प लाया गया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह आरोप गलत है कि इस संकल्प को तुष्टिकरण के लिए लाया गया है। सरकार का उदेश्य तथा नियत साफ है. जब सदन में सकंल्प को पारित किया जा रहा था तब विपक्ष के नेता धरमलाल कौशिक ने इसे वापस लेने का अनुरोध किया. बाद में विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर दिया. विपक्ष की अनुपस्थिति में संकल्प को पारित कर दिया गया.