राजस्थान में कांग्रेस पार्टी में बगावत (Rajasthan Political Crisis) के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी सचेत हो गए हैं. चार माह पहले मध्यप्रदेश में आंतरिक कलह और फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत की वजह से सत्ता गंवाले वाली कांग्रेस राजस्थान में भी ऐसी ही स्थिति का सामना कर रही है. राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे सचिन पायलट (Sachi Pilot) ने बगावत कर दी है. Also Read - राहुल गांधी का PM मोदी पर हमला- पहली बार दशहरा में 'रावण' नहीं, प्रधानमंत्री का पुतला जलाया गया

इन दो राज्यों में पार्टी की दुर्दशा का असर छत्तीसगढ़ में पड़ने की आशंका है. ऐसे में समय रहते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सचेत हो गए हैं. उन्होंने पार्टी में कोई असंतोष न पैदा हो इसके लिए मंगलवार को 15 विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किया. कहा जा रहा है कि राज्य कांग्रेस में संभावित असंतोष की आशंका को दबाने के लिए बघेल ने यह कदम उठाया है. Also Read - भूमि कानूनों में संशोधनों पर कांग्रेस ने कहा- जम्मू-कश्मीर की जनता छला हुआ महसूस कर रही है

बघेल ने मंगलवार की शाम अपने शासकीय निवास में आयोजित समारोह में 15 विधायकों को संसदीय सचिव के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी. Also Read - केंद्र के एग्रीकल्‍चर एक्‍ट को निष्‍प्रभावी करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कृषि उपज मंडी संशोधन बिल 2020 पारित किया

नव-नियुक्त संसदीय सचिवों में चिंतामणी महाराज ने संस्कृत में शपथ ली, जबकि पारसनाथ राजवाड़े, अंबिका सिंहदेव, चन्द्रदेव प्रसाद राय, द्वारिकाधीश यादव, गुरूदयाल सिंह बंजारे, इंद्रशाह मण्डावी, कुंवरसिंह निषाद, रश्मि आशीष सिंह, रेखचंद जैन, शकुन्तला साहू, शिशुपाल सोरी, यू.डी. मिंज, विकास उपाध्याय और विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने हिन्दी में शपथ ली.

शपथ ग्रहण के बाद मुख्यमंत्री बघेल ने सभी नव नियुक्त संसदीय सचिवों को बधाई और शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि सभी संसदीय सचिवों को अनुभवी मंत्रियों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा. उन्होंने नवनियुक्त संसदीय सचिवों से इस अवसर को सीखने के रूप में लेने और अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करने का आग्रह किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सफलता के लिए अपने क्षेत्र में पकड़, प्रशासकीय कामकाज की जानकारी तथा विधानसभा की गतिविधियों में पारंगत होना आवश्यक है.

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि शपथ ग्रहण कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री बघेल के अनुमोदन से सभी नव-नियुक्त संसदीय सचिवों को मंत्रियों से सम्बद्ध करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है.

इस आदेश के तहत संसदीय सचिव द्वारिकाधीश यादव को स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम से तथा विनोद सेवन चंद्राकर और गुरूदयाल सिंह बंजारे को स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव से सम्बद्ध किया गया है.

अधिकारियों ने बताया कि चन्द्रदेव प्रसाद राय और शिशुपाल सोरी को वन मंत्री मोहम्मद अकबर से, शकुन्तला साहू को कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे के साथ, विकास उपाध्याय और चिंतामणि महाराज को गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू से, अंबिका सिंहदेव को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गुरू रूद्रकुमार से तथा यू.डी. मिंज को उद्योग मंत्री कवासी लखमा से सम्बद्ध किया गया है.

उन्होंने बताया कि संसदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े को उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल से, इंद्रशाह मण्डावी को राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से, कुंवरसिंह निषाद को खाद्य मंत्री अमरजीत भगत से, रश्मि आशीष सिंह को महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेंड़िया से तथा रेखचंद जैन को नगरीय प्रशासन मंत्री शिव कुमार डहरिया से सम्बद्ध किया गया है.

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत, सांसद पी. एल. पुनिया सहित राज्य सरकार के सभी मंत्री, विधायक, अनेक जनप्रतिनिधि सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

राज्य में संसदीय संचिवों की नियुक्ति के बाद मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने राज्य में संसदीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा की गई संसदीय सचिवों की नियुक्ति पर भाजपा सरकार को बिना कारण बदनाम करने के लिए अब पूरे प्रदेश से बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए.

मूणत ने कहा कि संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को लेकर विपक्ष में रहते हुए मुख्यमंत्री बघेल तत्कालीन भाजपा प्रदेश सरकार के खिलाफ न्यायालय तक चले गए थे और आज सत्ता में आने के बाद कांग्रेस में ही मचे घमासान को शांत करने संसदीय सचिव नियुक्त कर रहे हैं.

पूर्व मंत्री ने कहा कि जब राज्य सरकार कोरोना वायरस के खिलाफ जारी जंग को पैसों की कमी बताकर कमजोर कर रही है तब संसदीय सचिवों की नियुक्ति से राज्य पर जो अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, उसके लिए मुख्यमंत्री को बताना होगा कि राज्य के खजाने में पैसा कहां से आएगा.

छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा 11 संसदीय सचिवों की नियुक्ति के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वर्तमान वन मंत्री मोहम्मद अकबर और आरटीआई कार्यकर्ता राकेश चौबे ने इस नियुक्ति को असंवैधानिक बताते हुए वर्ष 2017 में उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.

राज्य में नए संसदीय सचिवों की नियुक्ति के बाद वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने संवाददाताओं से कहा कि नए संसदीय सचिव मंत्री के रूप में काम नहीं करेंगे बल्कि मंत्रियों के संसदीय कार्यों की सहायता के लिए इन्हें नियुक्त किया गया है.

(इनपुट भाषा)