रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी के डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में खड़ा किया गया 101 फीट ऊंचा रावण का पुतला शुक्रवार के बजाय गुरुवार देर रात ही ट्रायल के दौरान जलकर खाक हो गया. देर रात हुए अचानक हुए कई जोरदार धमाकों से आस-पास के लोग सहम गए. बारूदी धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी.

रावण को बचाया नहीं जा सका
सूचना पर कई दमकल गाड़ियां दशहरा मैदान में पहुंचीं. पुलिस की टीम भी पहुंची. अग्निशमन दस्तों ने काफी मशक्कत की, लेकिन रावण के पुतले को नहीं बचाया जा सका. दशहरा मैदान में खड़े 85-85 फीट के कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले हालांकि सुरक्षित रहे. आनन-फानन में रावण का दूसरा पुतला बनाने का काम तत्काल तेजी से शुरू किया गया.

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अपने आप ख़ाक !
घटना की सूचना मिलने के बाद एडिशनल एसपी ग्रामीण सुखनंदन राठौर पहुंचे. उन्होंने बताया कि गुरुवार रात पुतले को खड़ा कर इलेक्ट्रॉनिक सामान की टेस्टिंग चल रही थी. इसी दौरान पुतले में आग लग गई. फायर ब्रिगेड की गाड़ी के पहुंचने तक पूरा पुतला जल चुका था. घटना के बाद दशहरा उत्सव के कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया.

दूसरा पुतला 10 घंटों में हुआ तैयार
रायपुर के डब्ल्यूआरएस कॉलोनी का दशहरा उत्सव काफी विख्यात है. यहां दूर-दूर से आकर बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं. दशहरा मैदान के समीप ही रेलवे ट्रेक है. पिछले वर्ष तो यहां रावण दहन और आकाशीय आतिशबाजी का नजारा देखने यात्रियों ने ट्रेन को चेन पुलिंग कर रोक दिया था. यहां के दशहरा उत्सव में आतिशबाजी आकर्षण का केंद्र रहती है.

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एडिशनल एसपी ने शुक्रवार की शाम बताया कि रावण का दूसरा पुतला 10 घंटों में तैयार कर लिया गया. ताजा पुतले को विधि-विधान से जलाया गया. दर्शकों ने करीब आधे घंटे तक आकाशीय आतिशबाजी का आनंद लिया. लंदन के हवाई झूले जैसी आतिशबाजी देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे. (इनपुट एजेंसी)