नई दिल्ली/छत्तीसगढ़. दुर्ग सेंट्रल जेल के बैरक नंबर 8 में बंद तपन सरकार अभी भी जरायम की दुनिया में उतना ही सक्रिय है, जितना 13 साल पहले था. पुलिस जांच में पता चला है कि वह बैरक से ही आपराधिक गतिविधियां में लिप्त है और अपने गैंग को चला रहा है. राज्य में उसके नाम की धमक आज भी है और जबरन वसूली से लेकर हत्या, हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र के मामलों को अंजाम दे रहा है.

तपन सरकार को लोग ”दादा” के नाम से भी जानते हैं. साल 1986 में मात्र 16 साल की उम्र में उसने जरायम की दुनिया में कदम रखा था. इसके बाद से लगभग 20 साल तक वह राज्य में डर का पर्याय बना रहा. उसके गैंग का खौफ चारों तरफ था और वह पुलिस की पकड़ से दूर. इस बीच साल 2005 में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली, जब एक हत्या के आरोप में तलाश कर रही पुलिस की पकड़ में वह आ गया. कोर्ट ने उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और तब से वह जेल में बंद है.

नए खुलासे ने उड़ाई पुलिस की नींद
तपन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को राहत मिली थी, लेकिन एक नया खुलासे ने उसकी नींद फिर उड़ा दी है. तपन एक बार फिर पुलिस के रडार पर है और राज्य में फैले उसके नेटवर्क की तलाश में लग गई है. 12 जुलाई को डीआईजी (जेल) केके गुप्ता ने तपन के गैंग को तोड़ने का आदेश दिया है. तपन का ट्रांसफर अंबिकापुर जेल कर दिया गया है. वहां वह एकांत कारावास में बंद है. उसके गैंग के 12 अन्य सदस्यों को बिलासपुर, जगदलपुर, रायपुर और अंबिकापुर में भेज दिया गया है.

21 सिम कार्ड मिले
दुर्ग पुलिस की साइबर एनालिसिस विंग की जांच में 21 सिम कार्ड मिले हैं. इसमें से चार का प्रयोग तपन खुद करता था. उसने 30 से ज्यादा इंस्ट्रमेंट में इन सिम कार्ड को लगाया था. इसकी जांच में खुलासा हुआ है कि इनसे गैंग के सदस्यों को लगातार फोन किये जा रहे थे और उसपर फोन भी लगातार आ रहे थे. इसमें कुछ वकील और कुछ नेता भी शामिल हैं.

इस तरह के मामले दर्ज
दुर्ग पुलिस ने तपन और उसके साथियों के खिलाफ जबरन वसूली के आरोप में केस भी दर्द किया है. इसमें एक के खिलाफ धोखाधड़ी (420), महत्वपूर्ण सुरक्षा के धोखाधड़ी (467) और आपराधिक षडयंत्र (120बी) के मामले दर्द हैं. तपन के ऊपर आरोप है कि रियल इस्टेट कारोबारी और यश ग्रुप के मालिक जो कि चिटफंड स्कैम में जेल में बंद है उससे उसने बैक डेट पर स्टांप पर साइन कराकर भिलाई में करोड़ों रुपये की संपत्ति अपने नाम करा ली है. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, तपन ने बैक डेट पर एक एग्रीमेंट साइन कराया है. आरोप है कि किसी ने सारे कागजात जेल में पहुंचाए, जहां एग्रीमेंट टाइप और साइन हुआ.

कोलकाता से पहुंचा था दुर्ग
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सरकार का जन्म तो कोलकाता में हुआ, लेकिन 9वीं तक की पढ़ाई वह डोंगरगड़ मं किया. वहां उसके रेलवे कर्मचारी पिता की तैनाती थी. पिता के रिटायरमेंट के बाद सरकार अपने पांच भाई-बहनों के साथ रायपुर से 40 किमी दूर दुर्ग में रहने लगा. वहां के एक लोकल कॉलेज में बीकॉम में उसका दाखिला हो गया.

पार्किंग स्टैंड से मजबूत हुआ नेटवर्क
लेकिन, यहीं से उसका क्रिमिनल रिकॉर्ड बनना शुरू हो गया. उसका पहला केस 10वीं में ही सामने आ गया था और उसके ऊपर धारा 324, 506बी और 294 के तहत केस दर्ज हुआ था. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1990 में उसे दुर्ग रेलवे स्टेशन के पास साइकिल-मोटरसाइकिल पार्किंग का स्टैंड मिल गया. इसके बाद ही वहां उसने अपना गैंग बना लिया.

हर कोई साथ रखना चाहता था
अपने इस गैंग से तपन ने काफी पैसे कमाए और भिलाई तक उसके नाम की गूंज होने लगी. नेता अलग-अलग प्रोजेक्ट पर उसका यूज करने लगे. शराब कारोबारियों से उसके रिश्ते हो गए और वह जबरन वसूली में आगे बढ़ता गया. हर कोई उसे अपने साथ रखना चाहता था. इसी बीच उसने पूरे राज्य में एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर दिया. साल 2000 तक वह दूसरे अपराधियों को शरण देने लगा था.

2005 में हुआ गिरफ्तार
साल 2005 में गैंगस्टर महादेव महर की भिलाई में हत्या हो गई. इसके पांच महीने बाद ही पुलिस ने तपन और उसके 5 साथियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया. रिपोर्ट के मुताबिक, महर उसे शराब के कारोबार में चुनौती दे रहा था, जिसके बाद उसकी हत्या हुई.

2015 में आजीवन कारावास
साल 2015 में इस मामले में तपन को आजीवन उम्रकैद की सजा सुनाई गई. लेकिन, उसकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती. पांच महीने पहले जेल से बाहर आए कुछ लोगों ने खुलासा किया कि किस तरह वह जेल के अंदर से ही अपने नेटवर्क को चला रहा है. इसके बाद से ही वह पुलिस के रडार पर था. अब पुलिस ने उसपर कार्रवाई करते हुए उसे अंबिकापुर जेल में शिफ्ट कर दिया है. वहीं उसके दूसरे साथियों को राज्य के अलग-अलग जेलों में भेज दिया गया है.